कार खरीदारों के बीच जीएसटी से उत्साह

अजय मोदी |  Jul 30, 2017 09:31 PM IST

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने से पहले ही वाहन उद्योग ने उपभोक्ताओं के चेहरे पर मुस्कान ला दी थी। 1 जुलाई से कुछ हफ्ते पहले ही कार निर्माता कंपनियों और डीलरों ने पहले से जमा कारों की खेप कम करने और इनपुट टैक्स क्रेडिट हाथ से जाने के डर से ग्राहकों को अच्छी-खासी छूट देने की पेशकश शुरू कर दी थी। महंगी कारों की निर्माता मर्सिडीज और बीएमडब्ल्यू ने तो जीएसटी के बाद लागू होने वाली कीमतों के समतूल्य मूल्य पर ग्राहकों को फायदा देना शुरू कर दिया। ग्राहकों ने भी उत्साह से खरीदारी की और नतीजा यह हुआ कि जून में कारों की खुदरा बिक्री में खासी बढ़ोतरी दर्ज हुई।  

 
1 जुलाई से जीएसटी लागू होने के बाद कर देनदारी कम होने से विनिर्माताओं ने कीमतों में कटौती करनी शुरू कर दी। छोटी कारों की कीमतों में 1-2 प्रतिशत जबकि बड़ी कारों की बिक्री मेंं 8-10 प्रतिशत तक की कटौती की गई। वाहन क्षेत्र में जीएसटी प्रणाली लागू होने से सबसे अधिक लाभ महंगी कारों और एसयूवी को हुआ, क्योंकि कीमतें 10 प्रतिशत तक कम हो गईं। एक ओर बात यह देखने में आई कि कंपनियों ने पहली बार पूरे देश में समान कीमतों पर वाहन उतारने शुरू किए। मर्सिडीज, वोल्वो, स्कोडा और निसान जैसी कंपनियां यह चलन पहले ही शुरू कर चुकी हैं। हालांकि सड़क एवं पंजीयन शुल्कों में भिन्नता के कारण अंतिम कीमतें (ऑन रोड प्राइस) अब ऊपर नीचे हो सकती है। महत्त्वपूर्ण बात यह है कि इससे कीमतों में पारदर्शिता जरूर आई है। देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजूकी के कार्यकारी निदेशक (विपणन एवं बिक्री) आर एस कलसी ने कहा कि जहां तक जीएसटी क्रियान्वयन की बात है तो मारुति के साथ काम करने पर उन्हें फक्र हो रहा है। कंपनी ने कहा कि वित्त, बिक्री, आईटी आदि सभी दृष्टिï से उसने अपने आप को पहले ही तैयार कर लिया था। कलसी ने कहा, '1 जुलाई को जीएसटी प्रभावी होने से चारो तरफ शोर-शराबा था, लेकिन उस दिन हमने पूर्वाह्नï 11 बजे तक कारें और कल-पुर्जे भेजने शुरू कर दिए थे। जीएसटी लागू होने के कुछ घंटे बाद तक कुछेक बाधाएं जरूर आईं, लेकिन हमारी पूरी प्रणाली तैयार थी।' मारुति सुजूकी के मानेसर और गुडग़ांव संयंत्र में हरेक दिन 4,000 ट्रक आते हैं और  िनकलते हैं। कंपनी के दो अन्य संंयंत्र भी रोजाना 2,500 वेंडरों से 3,400 से अधिक ट्रकों में कच्चा माल प्राप्त करते हैं और रोजाना कारों से लटे 650 टे्रलर बाहर भेजते हैं। कलसी कहते हैं, 'हमारे हजारों वेंडर हैं और उनका भी अपना लंबा-चौड़ा तंत्र है, जिसे मद्देनजर रखते हुए हमने आसानी से सब कुछ कर लिया। हमारी टीम ने वेंडरों को जीएसटी लागू होने के बाद की परिस्थितियों से उन्हें अवगत कराया। हम सभी गतिविधियों पर पैनी नजर रख रहे हैं। लॉजिस्टिक की बात करें तो राज्य सीमा पर दिक्कतें दूर कर दीग ई हैं, जिसे सामान की तेजी से आवाजाही में मदद मिलेगी। अभी कुछ और समय लग सकता है, लेकिन खासा सुधार होगा।' कलसी का मानना है कि जीएसटी के मांग में तेजी आएगी। 
 
देश में दूसरी सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी हुंडई का मानना है कि अगले कुछ सालों में वाहन उद्योग में मौजूदा 8 प्रतिशत के मुकाबले 15 प्रतिशत दर से वृद्धि करने की संभावना है। कंपनी जीएसटी और वृहद आर्थिक हालात को इसकी वजह मानती है। कंपनी में निदेशक (बिक्री एवं विपणन) राकेश श्रीवास्तव कहते हैं, 'हमारा मानना है किसबसे अधिक लाभ हुंडई को होगा। हमारे पास 3 लाख रुपये से 30 लाख रुपये तक की कार है। 10 लाख रुपये से अधिक खंड में हमें जीएसटी से मजबूती मिलेगी।' कंपनी अपने संयंत्रों से डीलरों और बंदरगाहों तक रोजाना 2,000 कारों की आपूर्ति करती है। हुंडई के अनुसार जीएसटी से आवाजाही में लगने वाला समय पहले के मुकाबले कम होगा। 
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