नोटबंदी के दौरान नकदी जमा में 1,000 करोड़ रुपये के घोटाले का पर्दाफाश

श्रीमी चौधरी | मुंबई Aug 03, 2017 10:32 PM IST

समितियों ने नोटबंदी के दौैरान जमा कराए थे करोड़ों रुपये

देश भर में करीब 1,263 समितियां हैं जिनमें से महाराष्ट्र में हैं सर्वाधिक 558 समितियां

आयकर विभाग ने नोटबंदी के दौरान हुए करीब 1,000 करोड़ रुपये के घोटाले का पर्दाफाश किया है। इसमें सहकारी ऋण समितियों के अधिकारी और सदस्य शामिल हैं। इन समितियों ने नोटबंदी के दौरान बैंकों में भारी नकदी जमा कराई थी। विभाग के शुरुआती अनुमानों के मुताबिक पिछले साल नवंबर और दिसंबर के दौरान करीब 1,000 करोड़ रुपये की कर चोरी की गई।

आयकर विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि नोटबंदी के दौरान कई सहकारी ऋण समितियों के खातों में अचानक भारी नकदी जमा हो गई थी जिससे इस पूरी व्यवस्था को लेकर अधिकारियों के कान खड़े हो गए थे। नोटबंदी के 50 दिन बाद वाणिज्यिक बैंकों ने वित्तीय लेनदेन के बारे में आंकड़े जमा कराए थे। इन आंकड़ों की जांच के दौरान यह घोटाला सामने आया। बैंकों से मिली जानकारी और आंकड़ों के आधार पर आयकर विभाग ने देशभर में दो दर्जन से अधिक सहकारी ऋण समितियों की तलाशी ली। इन समितियों के सदस्यों और जमाकर्ताओं को भी खंगाला गया। नोटबंदी के दौरान इन समितियों में भारी मात्रा में नकदी जमा करने वाले सदस्यों की आय के स्रोत का पता लगाने के लिए मुख्यत: महाराष्ट्र, दिल्ली, गुजरात और पश्चिम बंगाल में यह कार्रवाई की गई। 

विभाग के सूत्रों के मुताबिक देश के विभिन्न बैंकों की शाखाओं में मौजूद इन समितियों के खातों में भारी नकदी जमा की गई। इस राशि को फिर रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (आरटीजीएस) के जरिये कई दूसरे लोगों के बैंक खातों में स्थानांतरित किया गया। आंकड़ों के मुताबिक नोटबंदी के दौरान इन समितियों ने करीब 200 आरटीजीएस लेनदेन किए। सहकारी ऋण समितियों का पंजीकरण और नियमन भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) करता है।

इन समिति का मकसद खासकर ग्रामीण इलाकों में उन लोगों का वित्तीय समावेशन करना है जो बैंकिंग व्यवस्था से बाहर हैं। कर अधिकारी ने कहा, 'इन समितियों को अपने सदस्यों के पैसे जमा कराने की अनुमति है। चूंकि ये समितियां कानूनन अपना काम कर रही हैं, इसलिए बैंकों को उन पर शक नहीं होता है।'

समितियों के कार्यालयों और उनके अहम पदाधिकारियों के आवासों की तलाशी के दौरान आयकर विभाग को कई नकद बहीखाते मिले जो सोना, आभूषण, विनिर्माण और प्रॉपर्टी का कारोबार करने वालों से ताल्लुक रखते थे। कर अधिकारी उन सदस्यों के खातों का पता लगा रहे हैं जिनकी जानकारी तलाशी अभियान के दौरान मिली थी। एक अधिकारी ने कहा कि विभाग को यह भी पता लगा है कि इन समितियों ने अपने ग्राहक को जाने (केवाईसी) नियमों की भी धज्जियां उड़ाई। इस बीच आयकर विभाग ने आरबीआई को रिपोर्ट भेजी है कि वह ऋण समितियों से जुड़े ब्योरे की जांच करे। जिन बैंकों में इन समितियों के खातें हैं उनके अधिकारियों से भी इस मसले पर चर्चा हुई है।
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