सरकार पर पड़ेगा खर्च का बोझ, 2 साल में पूंजीगत व्यय 26 % बढ़ने का अनुमान

अरूप रॉयचौधरी | नई दिल्ली Aug 10, 2017 10:40 PM IST

... कैसा है अनुमान
अगले दो साल राजकोषीय घाटा जीडीपी का 3 फीसदी रहेगा
राजस्व घाटा अगले साल 1.6 फीसदी रहने की उम्मीद
कुल खर्च में 21 फीसदी बढ़ोतरी का अनुमान
पेट्रोलियम सब्सिडी में होगी उल्लेखनीय कमी

सरकार ने अगले दो साल में अपना राजस्व व्यय 20 फीसदी और पूंजीगत व्यय करीब 26 फीसदी बढऩे का अनुमान जताया है। वित्त मंत्रालय द्वारा गुरुवार को संसद में पेश मध्यावधि व्यय रूपरेखा विवरण के मुताबिक सरकार का कुल खर्च अगले दो साल में 21 फीसदी बढऩे की उम्मीद है। सरकार का अनुमान है कि राजस्व व्यय 2018-19 में 20 लाख करोड़ रुपये और 2019-20 में 22.05 लाख करोड़ रुपये पहुंच जाएगा। इस साल के बजट अनुमान में यह राशि 18.37 लाख करोड़ रुपये है।

इसी तरह पूंजीगत व्यय के अगले वित्त वर्ष में 3.41 लाख करोड़ रुपये और 2019-20 में 3.9 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। इस साल इसके लिए करीब 3.1 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान है। कुल खर्च के अगले वर्ष 23.4 लाख करोड़ रुपये और 2019-20 में 25.95 लाख करोड़ रुपये रहने की उम्मीद है जबकि इस वित्त वर्ष के लिए 21.46 लाख करोड़ का प्रावधान है।

सरकार ने अगले दो साल में नॉमिनल (समायोजित) सकल घरेलू उत्पाद की वृद्घि 12.3 फीसदी रहने का अनुमान जताया है। सरकार की मानें तो अगले दो साल राजकोषीय घाटा जीडीपी का 3 फीसदी रहेगा जबकि राजस्व घाटा अगले साल 1.6 फीसदी और 2019-20 में 1.4 फीसदी रहने की उम्मीद है। इस वित्त वर्ष नॉमिनल जीडीपी का 11.75 फीसदी, राजकोषीय घाटे का 3.2 फीसदी और राजस्व घाटे का 1.9 फीसदी रहने का अनुमान है।

वेतन और पेेंशन के इतर रक्षा पर राजस्व व्यय में अगले वर्ष 10.4 फीसदी और 2019-20 में 8.5 फीसदी बढ़ोतरी की उम्मीद है। अगले वर्ष यह 2,01,511 करोड़ रुपये और 2019-20 में 2,18,629 करोड़ रुपये रहेगा। रक्षा पर पूंजीगत व्यय के अगले वर्ष 91,580 करोड़ रुपये और 2019-20 में 1.12 लाख करोड़ रुपये रहने की संभावना है। इस साल इसके लिए 91,580 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

खाद सब्सिडी के मौजूद वित्त वर्ष और 2019-20 के बीच 70,000 करोड़ रुपये पर बरकरार रहने का अनुमान है। खाद्य सब्सिडी का बिल अगले वर्ष 1.75 लाख करोड़ रुपये और 2019-20 में 2 लाख करोड़ रुपये पहुंचने की संभावना है। इस वित्त वर्ष इसके 1.45 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। अलबत्ता पेट्रोलियम सब्सिडी के मौजूदा 25,000 करोड़ रुपये से घटकर अगले वर्ष 18,000 करोड़ रुपये और 2019-20 में 10,000 करोड़ रुपये रहने की संभावना है। जीएसटी क्रियान्वयन और नोटबंदी के बाद निगरानी बढऩे से अगले दो साल में कर का दायरा बढऩे की उम्मीद है। सरकार का दावा है कि कर-जीडीपी अनुपात के अगले दो साल में 30 आधार अंक बढ़ेगा। इस अनुपात के अगले वर्ष 11.6 और 2019-20 में 11.9 फीसदी बढऩे का अनुमान है।
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