नीतिगत बदलाव की जरूरत पर जोर

साहिल मक्कड़ | नई दिल्ली Aug 11, 2017 09:41 PM IST

आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि स्वास्थ्य और शिक्षा में ज्यादा निवेश के साथ साथ इन दोनों क्षेत्रों में नीतियों में जरूरी बदलाव लाए जाने की भी जरूरत है। जहां शिक्षा क्षेत्र में लर्निंग प्रक्रिया को परिणाम-केंद्रित बनाए जाने की जरूरत है वहीं उपचार पर झूठे दावे करने वाले अस्पतालों को दंडित किया जाना चाहिए। वर्ष 2011-12 में शिक्षा पर सकल घरेलू उत्पाद का अनुमान 3.2 था जो 2016-17 में बरकरार रहा है। कुछ योजनाओं से बच्चों के प्राथमिक नामांकन में मदद मिली है जिनमें मध्याह्न भोजन, शिक्षा का अधिकार अधिनियम, सर्व शिक्षा अभियान मुख्य रूप से शामिल हैं। 
 
वहीं स्वास्थ्य के संदर्भ में सरकारी खर्च जीडीपी अनुपात के 1.5 फीसदी के आसपास बना हुआ है जबकि राष्टï्रीय स्वास्थ्य नीति में इसके लिए 2.5 फीसदी का समर्थन किया गया है। इसमें कहा गया है, 'गुणवत्ता के मुद्दे पर ध्यान केंद्रित कर, डायग्नोस्टिक टेस्ट के लिए मानकीकृत दरें निर्धारित कर, वैकल्पिक स्वास्थ्य प्रणालियों के बारे में जागरूकता पैदा कर और सर्जरी और दवाओं के संबंध में झूठे दावे करने वाले अस्पतालों और निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं पर जुर्माना लगाने जैसे उपायों के जरिये इस क्षेत्र में बड़ा सुधार लाए जाने की जरूरत है। 
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