वंचितों तक पहुंचे अक्षय ऊर्जा

श्रेया जय | नई दिल्ली Aug 11, 2017 09:43 PM IST

आर्थिक समीक्षा में पेरिस जलवायु परिवर्तन समझौते के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा गया है कि वंचितों तक अक्षय ऊर्जा पहुंचाने की तत्काल जरूरत है। इसमें देश में अक्षय ऊर्जा के विकास का समर्थन किया गया है लेकिन साथ ही इसकी अधिकता के जोखिमों को लेकर चेताया भी गया है। समीक्षा के मुताबिक 11 रुपये प्रति यूनिट की दर पर अक्षय ऊर्जा की सामाजिक लागत कोयले से तीन गुना ज्यादा है। देश अक्षय ऊर्जा की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है लेकिन इसका बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जाना चाहिए। समीक्षा में कहा गया है, 'जलवायु परिवर्तन के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए अक्षय ऊर्जा में निवेश अहम है लेकिन कुल सामाजिक लागत को ध्यान में रखते हुए इस पर आगे बढऩा चाहिए।'
 
समीक्षा में कोयला आधारित परियोजनाओं के बजाय अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं की बढ़ती संख्या के दुष्प्रभावों और उसमें बढ़ती गैर निष्पादित परिसंपत्तियों को भी रेखांकित किया गया है। समीक्षा में कहा गया है कि अक्षय ऊर्जा की ज्यादा मात्रा से परंपरागत ऊर्जा संयंत्रों की इकाइयां बंद हो जाएंगी या फिर उन्हें पूरी क्षमता के साथ नहीं चलाया जाएगा। इसका बैंकिंग व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है क्योंकि बैंकों ने इन परियोजनाओं को कर्ज दिया है। बैंक पहले ही फंसे हुए कर्ज की समस्या का सामना कर रहे हैं और परियोजनाओं के ठप होने से उनकी स्थिति बदतर हो सकती है। मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन ने आर्थिक समीक्षा में कहा है कि देश में अब भी 49 फीसदी लोग खाना बनाने के लिए लकड़ी का इस्तेमाल करते हैं और बिजली के  मामले में भी यही स्थति है। उन्होंने कहा, 'ऊर्जा तक पहुंच गरीबी उन्मूलन, स्वास्थ्य, औद्योगिकीकरण, शिक्षा, संचार ढांचे का प्रावधान और जलवायु परिवर्तन के खतरे को कम करने जैसे आर्थिक और सामाजिक विकास लक्ष्यों के साथ जुड़ी है।' समीक्षा में कहा गया है कि सरकार की विभिन्न योजनाओं से ऊर्जा पहुंच की स्थिति सुधर रही है। इसमें एलपीजी वितरण के लिए प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, एलपीजी सब्सिडी के लिए प्रत्यक्ष हस्तांतरित लाभ (पहल) और ग्रामीण विद्युतीकरण के लिए दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना को सफल बताया गया है। 
कीवर्ड economy, survey, आर्थिक समीक्षा,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक