निर्यात योजना में कमी का प्रस्ताव

शुभायन चक्रवर्ती | नई दिल्ली Aug 11, 2017 09:43 PM IST

आर्थिक समीक्षा में सुझाव दिया गया है कि सरकार को मौजूदा समय में चल रही विभिन्न निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं को आसान बनाना चाहिए जबकि उसका मकसद इनमें से कुछ को समाप्त करना भी होना चाहिए। समीक्षा में कहा गया है, 'कई शुल्कों को जीएसटी में शामिल किया गया है और यदि दरों में कमी की जाती है तो कुछ निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं को समाप्त किया जा सकता है।'
 
निर्मित वस्तुओं के मान्यताप्राप्त निर्यातकों को सामान्य तौर पर डï्यूटी ड्राबैक के स्वरूप में क्रेडिट इंसेंटिव प्राप्त होता है। तीन प्रमुख क्षेत्र-केंद्रित योजनाएं हैं एडवांस अथॉराइजेशन स्कीम, एक्सपोर्ट प्रमोशन कैपिटल गुडï्ïस स्कीम और डीम्ड एक्सपोट्ïर्स स्कीम, और सरकारी भुगतान में इनका 35,000 करोड़ रुपये का योगदान है। इसके अलावा, कारोबारियों को सर्विसेज एक्सपोट्ïर्स फ्रॉम इंडिया स्कीम और इंक्रीमेंटल एक्सपोर्ट इंसेंटिविजेशन स्कीम के साथ साथ मर्केंडाइज एक्सपोट्ïर्स फ्रॉम इंडिया स्कीम के तहत स्क्रिप के तौर पर डï्यूटी क्रेडिट भी प्राप्त होता है। 
 
सरकार ने पिछले सप्ताह ही यह स्पष्टï किया था कि उपर्युक्त तीन योजनाओं के तहत प्राप्त होने वाले स्क्रिप पर जीएसटी व्यवस्था में 12 फीसदी का कर लगेगा। हालांकि निर्यातकों ने इस विचार पर असहमति जताई है। इन स्क्रिप का इस्तेमाल वस्तु एवं सेवाओं की भविष्य में की जाने वाली खरीद पर सीमा शुल्क या उत्पाद या और सेवा कर जैसे केंद्रीय करों के भुगतान के लिए किया जा सकेगा। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोट्ïर्स ऑर्गनाइजेशंस के महानिदेशक अजय सहाय ने कहा कि हालांकि जीएसटी के तहत भुगतान के दायरे को सीमित कर सिर्फ सीमा शुल्क कर दिया गया है। 
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