वैश्विक उड़ान में बढ़े हिस्सेदारी

अरिंदम मजुमदार | नई दिल्ली Aug 11, 2017 09:44 PM IST

आर्थिक सर्वेक्षण में अंतरराष्ट्रीय हवाई यातायात में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए विदेशी उड़ान से जुड़े नियमों को उदार बनाने का सुझाव दिया गया है। साथ ही हवाई यातायात द्विपक्षीय अधिकारों पर बातचीत के दौरान घरेलू विमानों के लिए संरक्षणवाद की वकालत की गई है। गुरुवार को जारी 2016-17 की आर्थिक समीक्षा के दूसरे खंड में कहा गया है कि दूसरे देशों के साथ द्विपक्षीय हवाई सेवा समझौते के तहत क्षमता विस्तार का अधिकार देने की वजह से देश की विमानन कंपनियों को नुकसान पहुंचा है क्योंकि भारत से शुरू और खत्म होने वाले अंतरराष्ट्रीय हवाई यातायात में विदेशी विमानन कंपनियों का दबदबा है। समीक्षा में इसके लिए कई कारणों का हवाला दिया गया है मसलन विदेशी विमानन कंपनियों द्वारा 'सिक्स्थ फ्रीडम' का इस्तेमाल, दूसरे देशों के साथ द्विपक्षीय हवाई सेवा समझौते के तहत क्षमता विस्तार का अधिकार मिलना, देश का अपनी क्षमता के अधिकारों का कम इस्तेमाल करना और 0/20 नियम हवाई जहाज के बेड़े की कमी इसके लिए जिम्मेदार है।
 
'सिक्स्थ फ्रीडम' किसी देश के विमान का एक देश से दूसरे देश में उड़ान भरते वक्त अपने देश में रुकने का एक द्विपक्षीय हवाई यातायात अधिकार है। इस समीक्षा में कहा गया है कि भारत से जाने वाले और आने वाले अंतरराष्ट्रीय हवाई यातायात में देश की घरेलू विमानन कंपनियों की हिस्सेदारी काफी कम है। मिसाल के तौर पर एमिरेट्स भारत और ब्रिटेन के बीच अपनी हवाई सेवाएं देती है लेकिन अपने देश दुबई में रुकती है। वर्ष 2015-16 में कुल अंतरराष्ट्रीय यातायात में सिक्स्थ फ्रीडम यातायात की हिस्सेदारी 61.14 फीसदी है जो वर्ष 2014-15 के 59.15 फीसदी से अधिक है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने अपनी लगातार दी गई रिपोर्ट में देश की सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया के हितों को नुकसान पहुंचाने के लिएखाड़ी देशों को दिए गए अनियंत्रित सिक्स्थ फ्रीडम अधिकार को जिम्मेदार ठहराया है। 
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