जियो ने दूरसंचार कंपनियों के मुनाफे में लगाई सेंध

किरण राठी | नई दिल्ली Aug 11, 2017 09:44 PM IST

वर्ष 2016-17 के आर्थिक समीक्षा में यह कहा गया है कि पिछले साल 5 सितंबर को रिलायंस जियो (आरजियो) के दूरसंचार क्षेत्र में उतरने के साथ ही दूसरी दूरसंचार कंपनियों को अपने वॉयस और डेटा दरों में कटौती करने के लिए मजबूर होना पड़ा। कड़ी प्रतियोगिता, कीमतों को लेकर छिड़े संघर्ष और कम कमाई की वजह से यह क्षेत्र ऐसी स्थिति में फंस चुका है जिसका काफी फायदा उठाया जा सकते हैं। समीक्षा में कहा गया है कि इस क्षेत्र की गैर-निष्पादित आस्तियों की हिस्सेदारी में काफी बढ़ोतरी हुई है जो चिंताजनक है। 
 
समीक्षा के मुताबिक, 'सरकारी बैंकों में दूरसंचार क्षेत्र का कुल एनपीए (गैर-निष्पादित आस्तियां) कम होकर वर्ष 2016-17 में 2,335 करोड़ रुपये हो गया जो वर्ष 2015-16 में 3,456 करोड़ रुपये था। वहीं बुनियादी ढांचा क्षेत्र में एनपीए की हिस्सेदारी वर्ष 2016-17 में बढ़कर 8.7  फीसदी हो गई जो वर्ष 2015-16 में 5 फीसदी के स्तर पर थी।' समीक्षा में कहा गया है कि उदद्योग को ज्यादा स्पेक्ट्रम शुल्क का सामना भी करना पड़ा। देश की शीर्ष तीन दूरसंचार कंपनियों भारती एयरटेल, वोडाफोन और आइडिया सेल्युलर के समायोजित सकल राजस्व में वर्ष 2016-17 की तीसरी तिमाही में पिछली तिमाही के मुकाबले क्रमश: 7.98 फीसदी, 5.14 फीसदी और 4.91 फीसदी की कमी आई। आरजियो के आने से बढ़ती प्रतिस्पद्र्धा की वजह से सस्ती कॉल के बाद डेटा भी सस्ता हो गया। 
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