विश्व बैंक की रिपोर्ट की आलोचना

संजीव मुखर्जी और शुभायन चक्रवर्ती | नई दिल्ली Aug 28, 2017 09:52 PM IST

नीति आयोग ने पेश की अपनी 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' रिपोर्ट

रिपोर्ट में क्या है खास

► नीति आयोग की रिपोर्ट में विश्व बैंक की रिपोर्ट की तुलना में व्यापक कवरेज पर दिया गया है जोर
इसमें पता चला है कि व्यवसाय शुरू करने में 118 दिन लगते हैं, जबकि विश्व बैंक की रिपोर्ट में 26 दिन की बात कही गई है

सरकार ने 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' यानी व्यवसाय करने की प्रक्रिया को आसान बनाने के बारे में विश्व बैंक की रिपोर्ट की आलोचना की है जिसमें भारत को 50वें पायदान पहुंचने की उसकी मजबूत कोशिशों के विपरीत 130वें पायदान पर रखा गया है। वहीं नीति आयोग ने सोमवार को इस बारे में अपनी स्वयं की रिपोर्ट जारी की जिसमें कहा गया है कि 2016 में देश में किसी व्यवसाय को स्थापित करने में लगने वाला समय विश्व बैंक द्वारा बताए गए समय की तुलना में अधिक है।

रिपोर्ट 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, ऐन एंटरप्राइज सर्वे ऑफ इंडियन स्टेट्स' में कहा गया है कि विश्व बैंक का कारोबार स्थापित करने का मानदंड उचित नहीं है। कंपनियों को भारत में अपना व्यवसाय स्थापित करने में 118 दिन का समय लगता है जबकि विश्व बैंक ने यह समय 26 दिन का बताया है। नीति आयोग द्वारा यह रिपोर्ट मुंबई के आईडीएफसी इंस्टीट्यूट के साथ मिलकर तैयार की गई है। 

सामान्य तौर पर अक्टूबर के अंत तक आने वाली विश्व बैंक की रिपोर्ट दिल्ली और मुंबई में आसान व्यवसाय करने को लेकर सीमित है जबकि नीति आयोग की रिपोर्ट इस संदर्भ में काफी व्यापक है कि इसमें सभी राज्यों और अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, अंडमान एवं निकोबार और लक्ष्यद्वीप के सिवाय केंद्र शासित क्षेत्रों को शामिल किया गया है। व्यापक भौगोलिक कवरेज के अलावा, नीति आयोग की रिपोर्ट इस संदर्भ में भी विश्व बैंक की रिपोर्ट की तुलना में अलग है कि इसमें विशेषज्ञों और सरकार के बजाय कंपनियों के साथ उनके विचारों और अनुभवों पर बातचीत की गई। इसमें बड़े राज्यों में विश्लेषक विचारों के साथ कंपनियों के विचारों को जोड़ा गया।

नीति आयोग की रिपोर्ट में संगठित निर्माण पर ध्यान दिया गया है जबकि विश्व बैंक की रिपोर्ट में निर्माण और सेवाओं, दोनों को कवर किया गया। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री निर्मला सीतारामन ने कहा, 'विश्व बैंक की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रिपोर्ट में लोगों के विचार जानने के लिए दिल्ली और मुंबई में ही कुछ ही लोगों से बातचीत की गई, जिससे व्यापक एवं स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं आई है।'

कानून एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि भारत जैसे देश के बारे में महज कुछ लोगों से बात कर 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' के बारे में किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित तरीका नहीं है। उन्होंने जर्मनी का एक उदाहरण दिया, जहां आईटी और आईटीईएस पर रिपोर्ट भारत से पुराने डेटा के आधार पर तैयार की गई थी। प्रसाद ने नीति आयोग से प्रत्येक राज्य के डिजिटल तंत्र को मापने के लिए एक इंडेक्स पेश करने का भी आह्वान किया। प्रसाद ने कहा, 'मैं चाहता हूं कि भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था अगले 5-7 वर्षों में 1 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था में तब्दील होने में सफल हो।'
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