वित्त वर्ष में बदलाव की योजना ठंडे बस्ते में

अरूप रायचौधरी | नई दिल्ली Aug 28, 2017 10:40 PM IST

वित्त वर्ष जनवरी-दिसंबर करने की योजना टली

कई राज्य इस बदलाव के पक्ष में नही
वित्त वर्ष बदलाव को मंजूरी देने वाला पहला राज्य है मध्य प्रदेश

वित्त वर्ष को मौजूदा अप्रैल-मार्च की जगह जनवरी-दिसंबर करने की केंद्र सरकार की योजना को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। सरकार के एक वरिष्ठï अधिकारी ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार के मौजूदा पांच साल के कार्यकाल में ऐसा नहीं होने जा रहा है। उक्त अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि वित्त वर्ष में किसी भी तरह के बदलाव के लिए सभी राज्यों की सहमति की जरूरत होगी लेकिन कई राज्य इसके पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष को बदलकर जनवरी-दिसंबर करने की कवायद में सरकार को खास फायदा होता भी नहीं दिख रहा है। हालांकि इससे पहलेे कहा गया था कि वित्त वर्ष को जनवरी-दिसंबर करने का प्रस्ताव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रमुख विचारों में शामिल है।

अधिकारी ने कहा कि कई राज्यों में इस पर सहमति नहीं है। ऐसे में वित्त वर्ष में बदलाव को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। हालांकि इस बारे में अंतिम निर्णय 2019 में लिया जा सकता है। उन्होंने कहा, 'वस्तु एवं सेवा कर जैसे कई तरह के बदलावों के कारण वित्त वर्ष को पहले शुरू करने में समस्या हो सकती है।' अधिकारी ने कहा कि सरकार इससे भी वाकिफ है कि 2019 में आम चुनाव होने हैं और इससे प्रक्रिया जटिल हो सकती है और तुलनात्मक आंकड़ों की भी कमी होगी।

मोदी ने सबसे पहले अप्रैल में नीति आयोग की संचालन परिषद की बैठक में वित्त वर्ष में बदलाव के बारे में चर्चा की थी। इस बैठक में सभी राज्यों ने भी भाग लिया था। उन्होंने राज्यों से इस दिशा में काम करने को कहा था। इसके बाद मध्य प्रदेश अगले साल से जनवरी से वित्त वर्ष शुरू करने का औपचारिक ऐलान करने वाला पहला राज्य बना। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी संसद में कहा था कि सरकार वित्त वर्ष जनवरी-दिसंबर करने की योजना बना रही है। केंद्र शंकर आचार्य समिति की रिपोर्ट का अध्ययन कर रहा है, जिसे इस बदलाव के प्रभाव का आकलन करने का जिम्मा सौंपा गया था। समिति की रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया है लेकिन माना जा रहा है कि उसमें ऐसा बदलाव नहीं करने की सिफारिश की गई है।

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