पश्चिम बंगाल में अधिक पंजीकरण

नम्रता आचार्य | कोलकाता Aug 30, 2017 09:41 PM IST

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के बाद इसके तहत पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा नए पंजीकरण हुए हैं। राज्य में 1 जुलाई के बाद सबसे ज्यादा करीब 2,00,000 पंजीकरण हुए हैं। कर विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक इसकी वजह यह है कि दवा की दुकान, कपड़ा, आभूषण और लकड़ी के काम तथा इस तरह के अन्य कामों में लगे तमाम कारोबारी पहले कर के दायरे में नहीं थे, जो अब जीएसटी नेटवर्क में आ गए हैं।

 
मोटे अनुमानों के मुताबिक मूल्यवर्धित कर (वैट) के तहत पश्चिम बंगाल में करदाताओं की संख्या करीब 98,000 थी। इस तरह से जीएसटी के बाद दो लाख नए पंजीकरण से उम्मीद की जा रही है कि पश्चिम बंगाल को ज्यादा कर आएगा। बहरहाल कर की ज्यादा वसूली कर्ज का ब्याज चुकाने पर जाएगी, क्योंकि राज्य पर कर का भारी बोझ है। पश्चिम बंगाल को जीएसटी से फायदा हो सकता है क्योंकि यह खपत आधारित राज्य है। पिछले कुछ साल के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार ने बेहतर अनुपालन के माध्यम से कर की वसूली में सफलतापूर्वक बढ़ोतरी की है। 2017-18 में पश्चिम बंगाल सरकार ने अपना कर संग्रह करीब 55,787 करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया है, जो पिछले साल के 48,927 करोड़ रुपये कर संग्रह की तुलना में 14 प्रतिशत ज्यादा है। दरअसल पिछले 5 साल के दौरान पश्चम बंगाल के खुद के कर संग्रह में करीब 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। 2012-13 में राज्य का अपना कर संग्रह करीब 32,808 करोड़ रुपये था। 
 
हालांकि सरकार ने कर संग्रह 55,787 करोड़ रुपये होने का अनुमान लगाया है, वहीं कर्ज भुगतान (मूलधन व ब्याज) का बोझ 2017-18 में करीब 45,350 करोड़ रुपये है। पश्चिम बंगाल पर बकाये का कुल बोझ करीब 26,243 करोड़ रुपये है, जो राजस्व संग्रह के आधे से मामूली कम है। पश्चिम बंगाल कर के दुष्चक्र में फंसा हुआ है और कर्ज के भुगतान के लिए बाजार उधारी लेता रहा है। राज्य के वित्त मंत्री अमित मित्रा ने कहा कि हम 40,000 करोड़ रुपये उधार ले रहे हैं, जिसमें से 28,000 करोड़ रुपये ब्याज के रूप में वापस दे रहे हैं। 
कीवर्ड GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,

  
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