राजकोषीय घाटा 92.4 प्रतिशत पर

भाषा | नई दिल्ली Aug 31, 2017 09:58 PM IST

देश का राजकोषीय घाटा जुलाई अंत में पूरे वर्ष के बजट अनुमान का 92.4 प्रतिशत तक पहुंच गया। ऐसा विभिन्न सरकारी विभागों के लिए आवंटित वार्षिक खर्च का बड़ा हिस्सा वर्ष के शुरुआती महीनों में ही जारी करने की वजह से हुआ है। नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक के आंकड़ों के मुताबिक चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से जुलाई के दौरान राजकोषीय घाटा 5.04 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। पिछले वर्ष इसी अवधि में राजकोषीय घाटा पूरे वर्ष के बजट अनुमान का 73.7 प्रतिशत रहा था। 
 
वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान सरकार ने राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 3.2 प्रतिशत पर लाने का लक्ष्य रखा है। इससे पिछले वर्ष राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 3.5 प्रतिशत पर रखने के लक्ष्य को हासिल किया गया। सरकार ने चालू वित्त वर्ष का बजट अप्रैल में वित्त वर्ष की शुरुआत से पहले ही पारित करा लिया था। इससे विभिन्न मंत्रालयों को वित्तीय वर्ष शुरू होने के पहले महीने से उनके खर्चे प्रस्तावों पर आगे बढऩे का अवसर मिला और उन्हें इसके लिए प्रोत्साहित किया गया। 
 
महालेखापरीक्षक के आंकड़ों के मुताबिक जुलाई तक के चार माह के दौरान सरकार की राजस्व प्राप्ति भी सुधरकर 2.91 लाख करोड़ रुपये हो गई। हालांकि पूरे वित्त वर्ष के लिए रखे गए राजस्व प्राप्ति के लक्ष्य का यह 19.2 प्रतिशत ही है। चालू वित्त वर्ष में सरकार ने विभिन्न करों से 15.15 लाख करोड़ रुरुपये मिलने का अनुमान रखा है। पिछले वित्त वर्ष में इसी अवधि के दौरान सरकार की राजस्व तथा अन्य प्राप्तियां कुल बजट अनुमान का 18.6 प्रतिशत रही थी। महालेखा नियंत्रक के आंकड़ों के मुताबिक सरकारी खर्च क्रमबद्ध तरीके से बढ़ रहा है और जुलाई अंत में यह पूरे बजट अनुमान का 37.7 प्रतिशत तक पहुंच गया। कृषि, उपभोक्ता मामले, रक्षा और रेलवे मंत्रालयों में इस दौरान एक साल पहले के मुकाबले खर्च में वृद्धि दर्ज की गई है। इस दौरान राजस्व घाटा काफी बढ़ गया।
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