कर कानून में है बदलाव की जरूरत

श्रीमी चौधरी | मुंबई Sep 01, 2017 09:52 PM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मौजूदा कर व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव की वकालत की है। उन्होंने कहा कि देश के कर कानून और व्यवस्थाएं 50 साल से भी पुरानी हैं जो मौजूदा परिस्थितियों तथा आर्थिक हालात के अनुकूल नहीं हैं। सूत्रों के मुताबिक मोदी ने आज नई दिल्ली में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर अधिकारियों के सम्मेलन राजस्व ज्ञान संगम को संबोधित करते हुए कहा कि मौजूदा कर व्यवस्था की खामियां गिनाईं। उनका जोर ऐसी व्यवस्था बनाने पर है जहां कर विभाग की रणनीति पूरी तरह कर चोरों को पकडऩे के इर्दगिर्द हो। प्रधानमंत्री ने कहा कि करदाताओं और कर अधिकारियों के बीच विश्वास की भारी कमी है जो एक अप्रिय स्थिति है। उन्होंने विभाग को ऐसी व्यवस्था बनाने को कहा जहां आय कर के छापे नहीं पड़ें।

 
एक घंटे के भाषण में मोदी ने कर व्यवस्था पर सवाल उठाया और कहा कि देश में इस तरह की व्यवस्था क्यों है कि लोग नोटबंदी के बाद ही कर दायरे में आते हैं, या संपत्ति जब्त होने और मुखौटा कंपनियों का खुलासा होने पर ही ऐसा क्या होता है। प्रधानमंत्री ने कर व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कई सुझाव दिए। उन्होंने कर चोरों की तलाशी, धरपकड़ और जांच के लिए संसाधनों के व्यापक आवंटन पर नाखुशी जताई। प्रधानमंत्री को इस बात पर भी आपत्ति थी कि करदाताओं की जांच के लिए 90 फीसदी संसाधनों को झोंक दिया जाता है जबकि कर संग्रह में इसकी हिस्सेदारी केवल 9 फीसदी है। सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले एक आय कर अधिकारी ने कहा कि 90 फीसदी कर संग्रह अग्रिम कर से आता है जबकि बाकी कर जुटाने के लिए संसाधनों का व्यापक इस्तेमाल होता है।
 
मोदी ने कहा कि कर अधिकारियों को अपना काम करने के लिए सूचना तकनीक के अधिकाधिक इस्तेमाल की जरूरत है। उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि करदाताओं को कर अधिकारियों से न मिलना पड़े। विभाग से किसी भी तरह के सवाल जवाब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये होने चाहिए। उन्होंने कहा कि कर अधिकारियों को अगले एक साल के दौरान 100 शहरों और कस्बों में यह प्रयोग करना चाहिए और फिर इसी व्यवस्था पर चलना चाहिए। सूत्रों के मुताबिक मोदी ने तकनीक के इस्तेमाल पर जोर देते हुए कहा कि कंप्यूटर के ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल से भ्रष्टïाचार में कमी आएगी। उन्होंने कहा कि कर अधिकारी करदाताओं की जांच के लिए कंप्यूटर का इस्तेमाल करते हैं और इस व्यवस्था को और कारगर बनाने के लिए जांच करने वाली अधिकारी की जानकारी भी अपलोड की जानी चाहिए। इससे पारदर्शिता आएगी और जवाबदेही बढ़ेगी। सम्मेलन में भाग लेने वाले एक कर अधिकारी ने कहा, 'इन सुझावों का मतलब यह था कि मौजूदा परिस्थितियों के हिसाब से कर कानून और प्रक्रियाओं को आसान बनाया जाए।
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