'दूसरी तिमाही में 7.5 प्रतिशत होगी वृद्धि दर'

संजीव मुखर्जी | नई दिल्ली Sep 01, 2017 10:05 PM IST

नीति आयोग के नए उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 7 से 7.5 प्रतिशत पर पहुंच जाएगी। एक दिन पहले ही पहली तिमाही में वृद्धि दर 5.7 प्रतिशत रहने की खबर आई थी, जो मोदी सरकार के 3 साल के कार्यकाल में सबसे निचला स्तर है। कुमार ने कहा कि पहली तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर कम होने की वजह वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के पहले स्टॉक खत्म करना, डब्ल्यूपीआई का उच्च स्तर, आधार का असर रहा है। उन्होंने कहा कि कॉर्पोरेट निवेश पहले ही बढ़ा हुआ है। 
 
अरविंद पानगडिय़ा के इस्तीफे के बाद नीति आयोग के उपाध्यक्ष का पद संभालने पर अपने पहले संवाददाता सम्मेलन में कुमार ने कहा, 'मुझे विश्वास है कि जुलाई सितंबर तिमाही में अर्थव्यवस्था 7 से 7.5 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी। जीएसटी लागू होने के बाद स्टॉक निपटाने का असर पड़ा है, जो अब पूरा हो चुका। अब नए कर के बारे में ज्यादा स्पष्टता है।' उन्होंने कहा, 'जीएसटी के सुचारु क्रियान्वयन, मजबूत आर्थिक बुनियाद, बेहतर मॉनसून तथा एफडीआई एवं सेवा क्षेत्र के अच्छे प्रदर्शन से चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही (जुलाई से सितंबर) में आर्थिक प्रदर्शन बेहतर रहेगा।'
 
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पहली तिमाही के जीडीपी के आंकड़े ट्रेंड नहीं हैं। उन्होंने इस बात की वकालत की कि नीति आयोग अन्य पर भरोसा करने के बजाय वृद्धि दर के अनुमान का अपना मॉडल विकसित कर सकता है। जीन संवर्धित फसलों और कृषि से होने वाली आमदनी पर कर लगाए जाने जैसे विवादास्पद मसलों पर उन्होंने कोई सीधा जवाब नहीं दिया। कुमार ने कहा, 'आयोग में पदभार संभालने के पहले मैंने जीएम फसलों के समर्थकों व विरोधियों दोनों से ही विस्तार से बातचीत की है और इस मसले पर मुझे पर्याप्त सूचना है।'
कुमार ने सरकार को सलाह दी कि कृषि संबंधी मसलों जैसे उत्पादों के निर्यात पर प्रतिबंध आदि पर सरकार को हस्तक्षेप कम करना चाहिए। उन्होंने कहा, 'हमें कृषि क्षेत्र के बाहर की व्यवस्था जैसे खाद्य प्रसंस्करण आदि पर जोर देना चाहिए और कृषि को लाभप्रद बनाया जाना चाहिए।' 
 
नोटबंदी के असर के बारे में उन्होंने कहा कि इसका असर पहली तिमाही पर रहा है क्योंकि 500 और 1,000 रुपये की नोट बंद किए जाने के बाद से मुद्रा की कमी हो गई थी। नोटबंदी के बारे में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बयान के बारे में कुमार ने कहा कि तिमाही आंकड़ों के आधार पर कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। सिंह ने आर्थिक वृद्धि दर मेंं 2 प्रतिशत के करीब कमी आने का अनुमान लगाया था। नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने कहा, 'मेरे अभिभावक मनमोहन सिंह के पूरे सम्मान के साथ मैं कहना चाहता हूं कि तिमाही आंकड़े के  आधार पर यह नहीं कहा जा सकता है कि जीडीपी मेंं 1 से 2.5 प्रतिशत की गिरावट आएगी। 
 
जीडीपी वृद्धि में लगातार गिरावट भी हुई है। ऐतिहासिक अनुभव रहा है कि हर देश, जो बुनियादी प्रशासनिक सुधार करता है, उसके आउटपुट में कमी आती है।'  नौकरियों के सृजन का फार्मूला बनाने के बारे में कुमार ने कहा, 'हमें खुद का मॉडल विकसित करने की जरूरत है। यह मॉडल नौकरियों के सृजन का कठिन लक्ष्य पूरा करेगा। चाहे वह बेरोजगारी हो या अल्प रोजगार, यह मसला नहीं है। असल मसला यह है कि हमने नौकरियों का सृजन किया। हमने युवाओं की आकांक्षाओं को पूरा किया।' कुमार ने इस बात पर जोर दिया कि किसानों का संकट वास्तविक है, काल्पनिक नहीं। यह पूछे जाने पर कि आयोग कब तक अपना 15 साल का दृष्टिपत्र तैयार कर लेगा, कुमार ने कहा कि इस क्षेत्र में ज्यादातर काम हो चुका है। 
 
नीति आयोग के उपाध्यक्ष का पद अर्थशास्त्रियों का सपना
 
नीति आयोग के नवनियुक्त उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा कि वह जिस पद पर आएं हैं, वह किसी भी अर्थशास्त्री का एक सपना होता है। उन्होंने टीम इंडिया की तर्ज पर टीम नीति बनाकर आयोग में चल रहे कार्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प जताया। कुमार ने कहा, 'नीति आयोग का उपाध्यक्ष बनना किसी भी अर्थशास्त्री का सपना होता है। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसके लिए धन्यवाद देना चाहता हूं।' उन्होंने कहा कि वह टीम इंडिया की तरह टीम नीति बनाएंगे और जो काम चल रहे हैं उन्हें आगे बढ़ाते हुए नई ऊंचाई पर ले जाएंगे।  
 
कुमार ने इस मौके पर पूर्व उपाध्यक्ष अरविंद पानगडिय़ा का भी धन्यवाद दिया और कहा कि उन्होंने छोटे से पेड़ को बड़ा किया और रास्ता दिखाया है। उन्होंने कहा, 'हमें अगर अग्रणी देश बनना है तो सामान्य चीजों से काम नहीं चलेगा। हमें रूपांतरणकारी नीति बनानी होगी। पिटी हुई लकीर से काम नहीं चलेगा।' नए उपाध्यक्ष ने यह भी कहा कि नीति आयोग को एक प्लेटफॉर्म का सृजन करना होगा, जहां सभी हिस्सेदार भारत के लिए विचार दे सकें। नए उपाध्यक्ष ने संकेत दिए कि वह चाहते हैं कि बाहरी सलाहकार नीति आयोग में शामिल हों और वह राज्यों के समूह के साथ काम करना पसंद करेंगे। 
 
कुमार ने कहा, 'विकास को गति देने के लिए केंद्र एवं राज्यों को एक मंच पर लाना होगा। हम राज्यों के समूह के साथ काम करेंगे। सरकारी क्षमता बढ़ानी होगी।' हालांकि, उन्होंने यह भी कहा, 'यह कोई उनका विचार नहीं है बल्कि चीजें पहले से चल रही हैं। बस उसे आगे बढ़ाना है।' अपनी प्राथमिकता के बारे में उन्होंने कहा, 'हमारी प्राथमिकता जनसंख्या संबंधी लाभ का उपयोग, रोजगार सृजन, निजी निवेश को गति देना, कृषि में रूपांतरण, स्वास्थ्य तथा शिक्षा होगी। हमें अनुसंधान एवं विकास पर जोर देना होगा।'
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