महज 1 प्रतिशत बिल ही जीएसटीएन पर पहुंचे

दिलाशा सेठ | नई दिल्ली Sep 03, 2017 10:07 PM IST

वस्तु एवं सेवा कर नेटवर्क (जीएसटीएन) पर वस्तुओं और सेवाओं पर कर के इनवॉइस लोड करने की सुविधा दिए जाने के एक महीने के बाद जितनी उम्मीद की गई थी, उसका 1 प्रतिशत बिल ही लोड हुआ। इससे 5 सितंबर के करीब अंतिम वक्त में अफरातफरी हो सकती है और अंतिम तिथि बढ़ाए जाने का दबाव हो सकता है। जीएसटीआर1 रिटर्न फाइलिंग में सिर्फ 44 लाख बिल  ही अपलोड हुए हैं। यह सेवा 25 जुलाई से शुरू हुई थी। 
 
जीएसटीएन के एक अधिकारी ने कहा, 'कम से कम 44 करोड़ इनवाइस अपलोड किए जाने हैं। यह सुविधा 38 दिन से चालू है, लेकिन सिर्फ 44 लाख बिल अपलोड किए गए हैं। आखिरी वक्त में फाइलिंग मेंं वे त्रुटियां कर सकते हैं और सिस्टम उस रिटर्न को स्वीकार नहीं करेगा।' उन्होंने कहा कि ऐसे में करदाता तिथि बढ़ाए जाने की मांग कर सकते हैं। एक अन्य अधिकारी ने कहा, 'अगर लोगों को जीएसटीआर 1 फाइलिंग में वास्तव में कठिनाइयां आती हैं तो हम अंतिम तिथि बढ़ाए जाने पर विचार कर सकते हैं।'
 
जीएसटीआर 3बी का प्रोविजनल रिटर्न फाइल करने की अंतिम तिथि 20 अगस्त से बढ़ाकर 25 अगस्त कर दी गई थी, क्योंकि करदाताओं को फाइलिंग में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। कुल 59.5 लाख इकाइयों ने जीएसटी के लिए पंजीकरण कराया था, जिन्होंने 3.97 करोड़ रिटर्न जुलाई में फाइल किया है। इसमें कंपोजिशन स्कीम के तहत आने वाले शामिल नहीं है। इसके आधार पर 20-25 प्रतिशत लोगों ने पंजीकरण कराने के बाद कर रिटर्न दाखिल नहीं किया है। विशेषज्ञोंं का कहना है कि पहले दो महीने में करदाता स्व घोषणा फॉर्म जीएसटीआर 3बी से जूझ रहे थे। उन्होंने कहा कि इसकी वजह से उन्हें इनवाइस अपलोड करने के लिए वक्त नहीं लिम सका। डेलॉयट के एमएस मणि ने कहा, 'लोग जीएसटीआर 3 बी फाइलिंग में व्यस्त थे। अब वे बिल अपलोड करना शुरू करेंगे।' 
 
इसके अलावा जीएसटीएन में सुधार या संशोधन की गुंजाइश नहीं है, ऐसे में इंतजार करना ही बेहतर विकल्प रहा। पीडब्ल्यूसी इंडिया के प्रतीक जैन ने कहा, 'कुछ मामलों में  त्रुटियों की वजह से करदाता की कर देनदारी करोड़ो रुपये बढ़ गईं, जिसकी वजह से उच्च मात्रा में नकदी प्रवाह रही, क्योंकि कर भुगतान किए बगैर रिटर्न दाखिल नहीं किया जा सकता।'  उन्होंने कहा कि जीएसटीआर 2 की आखिरी तिथि 10 सितंबर 2017 थी, बहरहाल ऑफलाइन युटिलिटी अभी भी पोर्टल पर उपलब्ध नहीं है। इसके साथ ही मौजूदा सेज इकाइयों को लेकर भी मसला है, जिन्हें जीएसटी से बाहर रखा गया है। 
कीवर्ड GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक