निर्यातकों पर जीएसटी की मार

शुभायन चक्रवर्ती | नई दिल्ली Sep 15, 2017 10:06 PM IST

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के दो महीने बाद यह सामने आया है कि निर्यातकों की ऑर्डर बुक पर बुरा असर पड़ा है। अनुमान के मुताबिक सभी उद्योगों व उत्पादों की श्रेणी में ऑर्डर में 15 प्रतिशत की गिरावट आई है। फेडरेशन आफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (फियो) के आकलन के मुताबिक सबसे ज्यादा गिरावट उन निर्यात ऑर्डरों में आई है, जिनकी डिलिवरी अक्टूबर तक दी जानी थी। 
 
फियो के महानिदेशक अजय सहाय ने कहा कि जुलाई से दो महीनों तक यह गिरावट आई, जब जीएसटी पेश किया गया था, जिसकी वजह यह मानी जा रही है कि निर्यातकों ने क्रेडिट के अभाव में ऑर्डर नहीं लिए। नकदी के संकट की वजह से तमाम निर्यातकों को उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल मौजूदा कारोबार के परिचालन में करना पड़ा और उन्होंने विदेश से ऑर्डर को प्राथमिकता नहीं दी। 
 
इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (ईईपीसी) के कार्यकारी निदेशक भास्कर सरकार ने कहा कि उन निर्यातकों के माममले में यह प्रतिशत गिरावट ज्यादा थी, जिन्हें निर्यात चक्र में लंबा वक्त लगता है। सरकार ने कहा, 'कारोबारी निर्यातकों के साथ वे निर्यातक जिन्हें उत्पाद को लेने, उनके प्रसंस्करण और विदेश भेजने में 2-3 महीने का वक्त लगता है, उनका कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ, क्योंकि उनकी पूंजी लंबे समय के लिए फंस गई।' निर्यातकों को पहले उन वस्तुओं के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति थी, जिनका इस्तेमाल वे निर्यात के लिए माल तैयार करने के लिए कच्चे माल के रूप में करते थे। लेकिन जीएसटी के तहत उन्हें शुरुआत में शुल्क का भुगतान करना होगा और बाद में रिफंड के लिए आïवेदन करना होगा। जीएसटी लागू होने के बाद से उनके सामने नकदी का संकट था, जो सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आई। अनुमान के मुताबिक उनकी लागत 1.25 प्रतिशत तक बढ़ गई। विशेषज्ञोंं के मुताबिक रिफंड में देरी की वजह से छोटे कारोबारियों पर दबाव बढ़ा है, जबकि बड़ी इकाइयों को परिचालन में दिक्कत आ रही है। 
 
जीएसटी रिफंड का इंतजार
 
इसके साथ ही निर्यातकों का कहना है कि रिफंड लेने में बहुत कठिनाई आ रही है, यह आसान काम नहीं है। इसकी वजह यह है कि रिफंड प्रक्रिया मे देरी हो रही है, क्योंकि सरकार ने रिफंड दस्तावेज फाइल करने की तिथि बढ़ा दी है। ईईपीसी ने कहा है कि जीएसटीआर-1, जीएसटीआर-2 और जीएसटीआर-3 की तिथि बढ़ाकर 10 जुलाई, 31 अक्टूबर और 10 नवंबर कर दी गई है। तिथि बढ़ाए जाने का मतलब यह है कि जुलाई का रिफंड नवंबर के तीसरे सप्ताह में ही मिल सकेगा। इसी तरह से अगस्त महीने के लिए निर्यात रिफंड दिसंबर तक खिंचेगा और इसका असर सितंबर के रिफंड पर भी पड़ेगा। निर्यातकों का यह भी आरोप है कि जीएसटी लागू होने के बाद ड्यूटी ड्रॉबैक योजना के तहत राज्यों की ओर से मिलने वाला भुगतान रुक गया है। 
 
ड्यूटी स्क्रिप्स की भी चिंता
 
इसी तरह की समस्या ड्यूटी स्क्रिप्स को लेकर भी आ रही है। कर भुगतान के मामले में इसकी संभावनाएं घटा दी गई हैं। अगस्त महीने में सरकार ने स्क्रिप्स की बिक्री पर 12 प्रतिशत कर लगाया था, जो मर्केंडाइज एक्सपोर्ट फ्राम इंडिया स्कीम (एमईआईएस) जैसी योजनाओं के तहत मिलती हैं। एमईआईएस के अलावा सर्विस एक्सपोर्ट फ्राम इंडिया स्कीम और इन्क्रीमेंटल एक्सपोर्ट इंसेंटिवाइजेशन स्कीम के तहत मिलने वाले स्क्रिप्स की बिक्री पर भी कर लगाया गया है। सरकार के इस कदम की निर्यातकों ने कड़ी आलोचना की, जिनका कहना है कि इसका कोई तर्क नहीं है और इससे निर्यात पर बुरा असर पड़ेगा। इसके बाद जीएसटी परिषद की बैठक में कर घटाकर 4 प्रतिशत कर दिया गया। लेकिन जीएसटी लागू होने के पहले जहां स्क्रिप्स का इस्तेमाल उत्पाद शुल्क, सेवा कर और मूल्यवर्धित कर के भुगतान के लिए किया जा सकता था, अब इसका इस्तेमाल सिर्फ बुनियादी सीमा शुल्क के भुगतान में किया जा सकेगा। 
कीवर्ड GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,

  
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