'व्यापार समझौते का हो विस्तार'

शुभायन चक्रवर्ती | नई दिल्ली Sep 20, 2017 09:45 PM IST

वाणिज्य और उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु की सोल यात्रा के पहले दक्षिण कोरिया ने मौजूदा भारत-दक्षिण कोरिया व्यापार समझौते को विस्तार देने की इच्छा जताई है। प्रभु सोल में समझौते की समीक्षा करेंगे। बहरहाल भारत, मंत्रियों की आगामी उच्च स्तरीय बैठक  के पहले संभवत: समझौते की शर्तों को व्यापक बनाने को इच्छुक नहीं है। वाणिज्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कोरिया से हाल के महीनों में बड़े पैमाने पर सोने के आयात का उल्लेख करते हुए कहा कि कुछ गैर शुल्क बाधाओं के होने के बावजूद ऐसा हुआ। उन्होंने कहा कि समग्र आर्थिक हिस्सेदारी समझौते (सीईपीए) पर 2009 में हस्ताक्षर हुए थे, जिस पर कुछ काम करने की जरूरत है। 
 
बुधवार को कोरिया के कारोबार, उद्योग और ऊर्जा मंत्री यंग सैम किम ने समझौते को व्यापक करने की इच्छा जताते हुए कहा कि अभी भी कारोबार बढ़ाने की संभावनाएं मौजूद हैं। किम ने कहा, 'सीईपीए से द्विपक्षीय कारोबार की मात्रा 50 प्रतिशत बढ़ी है।' उन्होंने कहा कि इस समझौते में आने वाली वस्तुओं की संख्या आगे बढ़ाई जा सकती है और मूल नियमों को मजबूत किया जा सकता है। बहरहाल भारतीय कंपनियों ने बार बार कहा है कि सीईपीए से भारतीय कंपनियों की तुलना में कोरिया की कंपनियों को बहुत फायदा हुआ है। भारत को कोरिया के साथ कारोबार में 8 अरब डॉलर का कारोबारी घाटा है। भारत ने कोरिया से 12.58 अरब डॉलर का आयात किया है, जबकि निर्यात महज 4.24 अरब डॉलर है। 
 
तेल, गैस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाएंगे भारत, कजाकस्तान 
 
भारत और कजाकस्तान ने तेल एवं गैस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के उपायों पर बुधवार को चर्चा की। साथ ही अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (आईएनएसटीसी) को कजाकिस्तान-तुर्कमेनिस्तान-ईरान रेल संपर्क से जोड़कर इसके विस्तार पर बातचीत की। पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की अगुआई में एक प्रतिनिधिमंडल भारत-कजाकस्तान अंतर-सरकारी आयोग (आईजीसी) की बैठक में भाग लेने के लिए अस्ताना गया हुआ है। इसके सह-अध्यक्ष कजाकिस्तान के ऊर्जा मंत्री कानत बोजुमबाएव हैं। बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र, व्यापार, आर्थिक निवेश, परिवहन और संपर्क, कृषि, सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, स्वास्थ्य और सांस्कृतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की। यहां जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार दोनों पक्षों ने हाइड्रोकार्बन की खोज और उत्पादन तथा तेल एवं गैस क्षेत्र में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में निवेश को लेकर सहयोग बढ़ाने की संभावना पर भी चर्चा की। ओएनजीसी विदेश लिमिटेड की कैस्पियन सागर में स्थित सातपाएव तेलफील्ड में 25 प्रतिशत हिस्सेदारी है।  परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में दोनों पक्ष परमाणु विज्ञान के स्वास्थ्य एवं कृषि क्षेत्र में उपयोग पर काम करने को सहमत हुए। दोनों पक्षों ने अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा को कजाकिस्तान-तुर्कमेनिस्तान-ईरान रेल संपर्क से जोड़कर उसके विस्तार की संभावना पर चर्चा की। 
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