दो साल तक अर्थव्यवस्था में सुधार की उम्मीद नहीं

देव चटर्जी और विशाल छाबडि़या | मुंबई Sep 26, 2017 10:40 PM IST

'चुनावी मुद्रा' में होगी सरकार

अर्थव्यवस्था में अगले दो साल के दौरान सुधार आने की संभावना कम ही है क्योंकि सरकार 'चुनावी मुद्रा' में होगी, वहीं निजी क्षेत्र की कंपनियां 6.5 लाख करोड़ रुपये की कर्ज समस्या से जूझ रही हैं। यह कहना है देश की सबसे बड़ी बुनियादी ढांचा क्षेत्र की कंपनी लार्सन ऐंड टुब्रो के ग्रुप कार्यकारी चेयरमैन अनिल मणिभाई नाइक का। नाइक ने बिज़नेस स्टैंडर्ड के साथ बातचीत में बताया, 'देश चुनावी मुद्रा में है। अगले दो साल के दौरान आम चुनाव के अलावा कुछ राज्यों में भी चुनाव होना है। इससे सरकार का शीर्ष नेतृत्व चुनावी अभियान में व्यस्त रहेगा और प्रशासन पर ज्यादा ध्यान देना संभव नहीं होगा।'

उन्होंने कहा, 'निजी क्षेत्र भी निवेश करने की स्थिति में नहीं है क्योंकि कई कंपनियां पहले से ही कर्ज की समस्या से जूझ रही हैं, वहीं कुछ बड़ी कंपनियां अपने पूंजीगत व्यय कार्यक्रम को पूरा करने के लिए ही निवेश करना चाह रही हैं।' सरकार नई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को विकसित करने की जगह सामाजिक क्षेत्र पर ज्यादा खर्च कर सकती है। नाइक ने कहा, 'सरकार का ध्यान प्रशासन से ज्यादा चुनाव जीतने पर होगा। ऐसे में मुझे अगले दो साल तक अर्थव्यवस्था में सुधार की उम्मीद नजर नहीं आती है। हालांकि 2019 के बाद अर्थव्यवस्था में सुधार की उम्मीद की जा सकती है।'

एलऐंडटी को बुलंदी पर पहुंचाने वाले नाइक ने कहा कि कुछ बड़ी नई बुनियादी ढांचा परियोजनाएं, जैसे कि मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना, मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक और बिहार में गंगा पुल परियोजना को जापान या बहुराष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा वित्तपोषित किया गया है। विदेशी वित्तपोषण के बिना इन परियोजनाओं की कल्पना नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि सरकार के पास बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर निवेश के लिए पैसे नहीं हैं।

अगले महीने से एलऐंडटी के नए नेतृत्व को तराशने तथा कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व की जिम्मेदारी पर ज्यादा ध्यान देने जा रहे नाइक ने कहा, 'विदेशी निवेशक भारत में खासतौर पर बुनियादी ढांचा क्षेत्र में निवेश करने को उतना उत्सुक नहीं हैं। वर्तमान में 20,000 मेगावॉट की बिजली परियोजनाएं और 40 से 50 सड़क परियोजनाएं बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। इनमें हमारी बिजली परियोजनाएं भी शामिल हैं। लेकिन उसे कोई खरीदार नहीं मिल रहा है।' नाइक का मानना है कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) और नोटबंदी की वजह से अर्थव्यवस्था में नरमी आई है। उन्होंने कहा, 'जीएसटी और नोटबंदी से अर्थव्यवस्था में सुस्ती आई है लेकिन दीर्घावधि में राष्टï्र्रहित के लिहाज से ये कदम जरूरी थे।'

एलऐंडटी के बारे में नाइक ने कहा कि उनका समूह कुछ गैर-मुख्य कारोबार को विनिवेश करने की संभावना तलाश रहा है, ताकि कंपनी का ढांचा सरल हो सके। उन्होंने कहा, 'कई ऐसे कारोबार हैं जिनका राजस्व 1,000 करोड़ रुपये से भी कम है और उससे समूह का मूल्यवर्धन नहीं हो रहा है। ऐसे में हमने इन कारोबार से निकलने की योजना बनाई है और इसकी वजह से राजस्व को होने वाले नुकसान की भरपाई मुख्य कारोबार में उच्च राजस्व हासिल कर की जाएगी।' नकदी की ढेर पर बैठी एलऐंडटी ने सरकार के विनिवश कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया था और रक्षा जैसी कंपनियों में निवेश किया, जो उसका मुख्य कारोबार है। नाइक ने कहा, 'अगर सही अवसर मिला तो हम 5,000 से 10,000 करोड़ रुपये निवेश करने के लिए तैयार हैं।' नाइक ने कहा कि वह वह सलाह के लिए उपलब्ध रहेंगे।
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