पिछड़े गांवों में निजी क्षेत्र के साथ मिलकर होगा काम

संजीव मुखर्जी | नई दिल्ली Sep 27, 2017 09:36 PM IST

ग्राम सुधार की कवायद

1000 दिनों में 50,000 ग्राम पंचायतों में रह रहे एक करोड़ परिवारों का जीवन स्तर सुधारने का लक्ष्य
इसकी घोषणा 2017-18 के बजट में 'मिशन अंत्योदय' नाम से हुई थी
निजी क्षेत्र को न तो धन का आवंटन होगा, न प्रोत्साहन राशि दी जाएगी लेकिन उन्हें गांवों को चिह्नित करने की सुविधा व सेवाएं प्रदान की जाएंगी

ग्रामीण भारत के लिए बेहतर आर्थिक मॉडल बनाने के मकसद से केंद्र सरकार अंत्योदय योजना मिशन के तहत निजी कंपनियों, सामाजिक संगठनों और चुनिंदा ग्राम पंचायतों के बीच हिस्सेदारी बढ़ाने की योजना बना रही है। इस हिस्सेदारी के लिए देश भर के करीब 50,000 ग्राम पंचायतों को चिह्नित करने व उनकी रैंकिंग का काम किया गया है, जहां खासकर महिलाओं के स्वयं सहायता समूह (एसएचजी), बुनियादी बैंकिंग सुविधा, परिवारोंं के पास बैंक खाते नहीं के बराबर हैं। 

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, 'हम गांवोंं में उचित बुनियादी ढांचा स्थापित करने के लिए निजी क्षेत्र को कोई सब्सिडी या धन मुहैया नहीं कराएंगे, लेकिन सिर्फ सुविधा प्रदाता का काम करेंगे।' इस मिशन के तहत केंद्र सरकार ने अगले 1,000 दिन में करीब 50,000 ग्राम पंचायतों में 1 करोड़ से ज्यादा परिवारों का जीवन स्तर सुधारने की योजना बनाई है, जिनमें गरीबी घटाना, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, आर्थिक संपन्नता आदि जैसे मानक शामिल होंगे। इसके अलवा पहले से चुनी गई ग्राम पंचायतों में सामाजिक और बुनियादी ढांचे संबंधी खाईं को भी कम करने की कवायद होगी। 

इन गांवों मेंं केंद्र सरकार की मौजूदा योजनाओं जैसे बगैर बिजली वाले ज्यादातर परिवारों को उज्ज्वला बिजली योजना के तहत लाभ दिया जाना, स्वच्छ भारत मिशन के तहत उन मकानों में शौचालय बनवाना, जिनमें शौचालय नहीं हैं, आदि जैसे काम शालिम होंगे। अधिकारी ने बताया, 'मान लीजिए कि किसी ग्राम पंचायत में 0 से 3 साल के बीच के बच्चे कम वजन के और कुपोषित हैं तो हम वहां पोषण संबंधी जरूरतोंं पर ज्यादा ध्यान देंगे।' ग्राम पंचायतों का चयन संबंधित राज्यों की ओर से 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर किया गया है। यह आंकड़े सामाजिक-आर्थिक एवं जातीय जनगणना और केंद्र के कौशल कार्यक्रम से मिले हैं।

ग्राम पंचायतों को करीब 30 प्रतिशत अधिभार बुनियादी ढांचा और सभी मौसम में चलने योग्य सड़क, 12 घंटे रोजाना बिजली पाने वाले परिवारों का प्रतिशत, दो फसलों वाली कृषि भूमि का प्रतिशत, सिंचाई सुविधा आदि को दिया गया था। इसके अलावा 30 प्रतिशत अधिभार सामाजिक विकास की स्थिति और बच्चोंं के  टीकाकरण, 0-3 साल के बच्चों के कम वजन, कुपोषण आदि को दिया गया था। सबसे ज्यादा अधिभार आर्थिक विकास और जीविका के विविधीकरण जैसे परिवारों को बैंक का कर्ज, गैर कृषि क्षेत्र में रोजगार, बैंकों से संपर्क आदि को दिया गया।
कीवर्ड rural, economy, bank,

  
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