कम अग्रिम कर ने बढ़ाई फिकर, निगमित अग्रिम कर संग्रह की धीमी रही रफ्तार

दिलाशा सेठ | नई दिल्ली Sep 27, 2017 10:54 PM IST

पहली छमाही के कर संग्रह में अपेक्षाकृत कम वृद्धि

अग्रिम कर में कमी से कर संग्रह का लक्ष्य रह सकता है पीछे
अर्थव्यवस्था में नरमी और जीएसटी से कर संग्रह पर पड़ा असर
सरकार को कर संग्रह के लक्ष्य में करना पड़ सकता है संशोधन
अर्थव्यवस्था को रफ्तार के लिए तत्काल प्रोत्साहन की जरूरत

चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में निगमित अग्रिम कर संग्रह की रफ्तार धीमी रही है, जिससे सरकार को इस साल राजस्व संग्रह का लक्ष्य हासिल करने में चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही उसका राजकोषीय गणित भी गड़बड़ा सकता है। अर्थव्यवस्था में नरमी, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के क्रियान्वयन, बैंकिंग क्षेत्र की चिंता और कमजोर मांग से अग्रिम कर संग्रह पर असर पड़ा है। पहली छमाही में निगमित अग्रिम कर संग्रह 7.5 फीसदी बढ़ा, जबकि पिछले साल इसी दौरान 8 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई थी। 15 सितंबर तक कुल अग्रिम कर संग्रह 11 फीसदी बढ़ा, जबकि पिछले साल यह 14 फीसदी बढ़ा था।

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि अर्थव्यवस्था के परिदृश्य में नरमी को देखते हुए राजस्व संग्रह का लक्ष्य घटाना पड़ सकता है। एक अधिकारी ने कहा, 'खास तौर पर कंपनी जगत में अग्रिम कर संग्रह काफी खराब रहा है। अर्थव्यवस्था में नरमी बड़ी चुनौती है। ऐसे में अर्थव्यवस्था में जल्द तेजी नहीं आई तो कर संग्रह लक्ष्य पर दबाव बढ़ सकता है।' बैंकिंग, तेल और उत्खनन उद्योग के खराब प्रदर्शन से कर संग्रह पर असर पड़ा है। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि जीएसटी से भी प्रत्यक्ष कर संग्रह प्रभावित हुआ है। इसके साथ ही सकल घरेलू उत्पाद के आंकड़ों से भी अग्रिम कर संग्रह में कमी आई। 

चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में (16 सितंबर तक) प्रत्‍यक्ष कर संग्रह 15 फीसदी बढ़ा, जिसमें से निगमित कर 12 फीसदी और व्यक्तिगत आय कर 17 फीसदी बढ़ा है। सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए प्रत्यक्ष कर संग्रह में 15.7 फीसदी वृद्धि का लक्ष्य रखा था, जो 9.8 लाख करोड़ रुपये है। बहरहाल दूसरी छमाही में कर संग्रह में और कमी आ सकती है क्योंकि नोटबंदी और दो आय खुलासा योजनाओं की वजह से कर रिटर्न में संशोधन करना पड़ सकता है। इसके अलावा 2.5 लाख रुपये से 5 लाख रुपये आय पर व्यक्तिगत कर की दर भी 10 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दी है। यह भी आयकर संग्रह में कमी का कारण बन सकती है।

एक अन्य अधिकारी ने कहा, 'हम खर्च बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन पैकेज की उम्मीद कर रहे हैं, जिससे अर्थव्यवस्था में तेजी आ सकती है और कर संग्रह बढ़ सकता है। उम्मीद है कि प्रत्यक्ष कर में कमी नहीं आएगी।' उन्होंने कहा कि अगर अगर साल के बाकी महीनों में भी अर्थव्यवस्था की स्थिति ऐसी ही रही तो प्रत्यक्ष कर संग्रह के लक्ष्य में कटौती करनी पड़ सकती है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी की वृद्धि दर घटकर तीन साल के निचले स्तर 5.6 फीसदी पर आ गई थी।

इस बीच नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने भी राजकोषीय घाटे के लक्ष्य में ढील देने की वकालत की है ताकि पूंजीगत व्यय के लिए वित्तीय प्रोत्साहन दिया जा सके। जुलाई के अंत में राजकोषीय घाटा बजट अनुमान के 92.4 फीसदी पर पहुंच गया था, जबकि पिछले साल जुलाई तक यह 73.7 फीसदी पर ही पहुंचा था। सरकार ने राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 3.2 फीसदी तक सीमित करने का लक्ष्य रखा है। पिछले साल लक्ष्य 3.5 फीसदी का था, जिसे हासिल कर लिया गया था।
कीवर्ड Revenue, GST, Income Tax, CBDT, आयकर विभाग, कराधान,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक