कॉस्ट ऑडिट को लेकर होगी सख्ती

वीणा मणि | नई दिल्ली Oct 03, 2017 09:41 PM IST

कॉरपोरेट मामलों का मंत्रालय उन कंपनियों पर सख्ती करने पर विचार कर रहा है, जो कॉस्ट ऑडिट दाखिल नहीं करतीं, जिससे कि यह सुनिश्चित हो सके कि उनके कारोबार पर सही कॉर्पोरेशन करों का भुगतान किया जा रहा है और उपभोक्ता, उत्पाद का सही मूल्य जान सकें। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि मंत्रालय कम से कम 10 क्षेत्रों में कंपनियों की जांच करेगा जिससे उन कंपनियों को पकड़ा जा सके जो कॉस्ट एकाउंटेंट नहीं रखते और अपनी रिपोर्ट दाखिल करते हैं। टेक्सटाइल, मशीनरी, कीटनाशक, दूध पाउडर, सीसा, चाय, कॉफी ऐसे कुछ क्षेत्रों में शामिल हैं, जिनकी निगरानी की जाएगी। 
 
अधिकारी ने कहा कि सरकार के इस कदम से सुनिश्चित हो सकेगा कि फर्में कॉर्पोरेशन कर की चोरी न कर सकें। कॉस्ट ऑडिट से संबंधित कंपनी की कुशलता का पता चलता है और इससे उपभोक्ताओं को जानकारी मिलती है कि उत्पाद का उचित मूल्य लिया जा रहा है। अधिकारी ने कहा कि यह योजना निवेशकों को भी ध्यान में रखकर बनाई जा रही है। अधिकारी ने कहा, 'कॉस्ट ऑडिट दाखिल करना हमें बताता है कि  कंपनी आंक ड़ोंं में हेरफेर नहीं कर रही है, साथ ही निवेशकोंं को यह पता चलता है कि कंपनी की कॉस्ट को लेकर क्या योजना है।' 
 
इस समय 5,000 फर्में ऐसी हैं, जिन्हें कॉस्ट ऑडिट दाखिल करने की जरूरत है। बहरहाल सिर्फ 1,000 कंपनियां ऐसा करती हैं। सरकार इसके लिए उन कंपनियोंं में औचक निरीक्षण करने की योजना बना रही है, जो इसका अनुपालन नहीं करती हैं। अगर किसी कंपनी का सालाना कारोबार 35 करोड़ रुपये या इससे ऊपर होता है तो उसे कॉस्ट ऑडिट दाखिल करना होता है।
 
बहरहाल सूत्रों ने यह भी कहा कि मंत्रालय ने बैंकों से यह कहने की योजना बनाई है कि वे कंपनियों की ऑडिट रिपोर्ट का इस्तेमाल कंपनियों की विश्वसनीयता की जांच करने में भी करें। मंत्रालय ने नोटबंदी के बाद 3,00,000 खोखा कंपनियों को चिह्नित किया है। सूत्रों ने कहा कि नोटबंदी के बाद सरकार ने 50 दिन तक विशेष ऑडिट अभियान चलाया था, जिससे इन खोखा कंपनियों की गतिविधियों का पता लगाया जा सके। भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ोंं के मुताबिक धोखाधड़ी के कारण बैंकों का नुकसान 2012-13 के 9,750 करोड़ रुपये की तुलना में 2016-17 में 72 प्रतिशत बढ़कर 16,770 करोड़ रुपये हो गया है। बहरहाल सरकार ने खोखा कंपनियों का पंजीकरण रद्द करने, उनके निदेशकों को अयोग्य करार देने और उनके बैंक खातों को जब्त करने के लिए ह्विप जारी किया है। बैंकों से भी कहा गया है कि जो कंपनियां वैधानिक रिटर्न दाखिल नहीं करती हैं, उन्हें कर्ज देने से पहले सरकारी आंकड़ों के मुताबिक उनकी जांच करें। 
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