'जारी है मंदी, नए निवेश में बनी रहेगी सुस्ती'

बीएस संवाददाता | मुंबई Oct 04, 2017 10:04 PM IST

भारतीय रिजर्व बैंक ने नीतिगत दरों में आज कोई बदलाव नहीं किया, लिहाजा भारतीय कंपनी जगत ने कहा कि उन्हें निकट भविष्य में निवेश चक्र के बहाल होने की उम्मीद नहीं है, खास तौर से ज्यादा पूंजी वाले क्षेत्रों में। कंपनियों के सीईओ ने कहा कि भारत की बैंक दर पहले ही दुनिया भर में ऊंची है, जो विदेश में उधार लेने वाली विदेशी कंपनियों को दबाव वाली कंपनियां खरीदना आसान बनाती है, वहीं स्थानीय कंपनियां परेशानी झेलती है।
 
इसके अलावा उन्होंने कहा कि नोटबंदी और जीएसटी पहले ही प्रमुख क्षेत्रों मसलन कपड़ा व रियल एस्सेट आदि की कमर तोड़ चुके हैं और इस समय दरों में कटौती से कई कंपनियों को मदद मिलती। क्षमता इस्तेमाल की दर करीब 75 फीसदी रह गई है, जो कंपनियोंं को नई क्षमता में निवेश से रोकता है। जीएसटी से जुड़ी समस्याएं समाप्त होने तक कंपनियां नकदी को संरक्षित रखने को प्राथमिकता दे रही हैं।
 
महिंद्रा ऐंड महिंद्रा के ग्रुप सीएफओ वी एस पार्थसारथी ने कहा, भारत के लिए उच्च विकास जरूरी है। इसके लिए हमें सकारात्मक संकेत की दरकार है और इस लिहाज से यह मौका हाथ से निकल गया। हम स्थिति को यथावत बनाए रखने का स्वागत करते हैं लेकिन सकारात्मक संकेत जल्द आने चाहिए। सीईओ के पास चिंता की वजहें हैं। आरबीआई ने कहा कि आज विनिर्माण क्षेत्र महज 1.2 फीसदी बढ़ा है, जो 20 तिमाही का निचला स्तर है। 2016-17 की दूसरी छमाही में सुधार के संकेत देने वाले खनन क्षेत्र में एक बार फिर वित्त वर्ष 2017-18 की पहली तिमाही में गिरावट दिखने लगी क्योंकि कोयला उत्पादन घटा और कच्चे तेल का उत्पादन सुस्त रहा। आरबीआई ने अर्थव्यवस्था के बारे में ये बातें कही है।
 
जुलाई 2017 में आईआईपी में मामूली सुधार हुआ, जो जून में फिसल गया था। यह सुधार खनन, बिजली उत्पादन आदि में इजाफे की बदौलत हुआ। हालांकि विनिर्माण कमजोर बना रहा। इस्तेमाल आधारित वर्गीकरण के लिहाज से पूंजीगत सामान, मध्यवर्ती सामान व कंज्यूमर ड्यूरेबल में गिरावट ने कुल आईआईपी की बढ़त को पीछे खींच लिया। अगस्त में हालांकि प्रमुख उद्योगों का आउटपुट मजबूत रहा क्योंकि कोयला उत्पादन व बिजली उत्पादन में सुधार दर्ज हुआ। विनिर्माण क्षेत्र के एक सीईओ ने कहा, एक साल के भीतर पांच राज्यों में चुनाल होने हैं और आम चुनाव साल 2019 के मध्य में, ऐसे में कंपनियों की तरफ से निवेश धुंधला रहने की संभावना है। हमें कम से कम दो साल और इंतजार करना होगा।
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