त्योहारों पर चीनी सामान की बिक्री घटने का खटका

सुशील मिश्र | मुंबई Oct 06, 2017 10:00 PM IST

मुंबई में चीनी उत्पादों के सबसे बड़े बाजार क्रॉफर्ड मार्केट की दुकानों में इस बार वह चमक नहीं दिख रही है जो बीते समय में त्योहारों के दौरान दिखती थी। आमतौर पर त्योहार के समय चीनी उत्पादों के बाजार पटे रहते थे लेकिन इस बार माहौल थोड़ा बदला नजर आ रहा है। कारोबारियों का कहना है कि लोगों की सोच में बदलाव तो आया है लेकिन बहिष्कार जैसी कोई बात नहीं है। पिछले साल की अपेक्षा मांग कम होने की कई वजह है। चीनी सामान के विक्रेता दिलीप भाई कहते हैं कि यहां का कारोबार नकदी में चलता है लेकिन नोटबंदी के बाद नकद लेनेदेन कम हो गया है जिसके कारण कारोबार में गिरावट आई है। ऐसा सिर्फ हमारे कारोबार में ही नहीं है बल्कि जहां भी नकद में लेनदेन होता था वहां कारोबार में 40 से 50 फीसदी तक की गिरावट आई है। चीनी रिश्तों में बढ़ती कड़वाहट के असर पर उन्होंने कहा कि कुछ फर्क इसका भी है लेकिन चीनी वस्तुओं का अपना बाजार है, दाम कम होने की वजह से गरीब और आम आदमी इसे खरीदना पसंद करते हैं।
 
कारोबारी भावेश दलाल का कहना है कि सीमा पर विवाद के चलते लोग बहुत ज्यादा सामान मांगने से डर रहे हैं। कारोबारियों को लगता है कि कहीं उनका माल फंस न जाए। ऐसे में उनका ज्यादा जोर पहले से जमा स्टॉक को ही खत्त्म करने पर है।  यही वजह से कि इस बार पिछले साल की अपेक्षा चीनी उत्पादों की कम वैरायटी दिख रही  है। कारोबारियों का कहना है कि इस बार कारोबार पिछले साल की तुलना में कम ही रहेगा लेकिन इसकी वजह सीमा विवाद से ज्यादा वस्तु एवं सेवा कर है। कालबा देवी, क्रफार्ड मार्केट, दादर, अंधेरी जैसे इलाकों में चीनी उत्पादों के बड़े बाजारों में अभी तक दीवाली जैसी खरीदारी दिखाई नहीं दे रही है। कारोबारियों का कहना है कि इस बार उनके कारोबार में 50 फीसदी तक की गिरावट आ सकती है। हालांकि चीनी उत्पादों के कारोबारी मनीष भाई का कहना है कि त्योहार के नजदीक आने पर खरीदारी जोर पकड़ सकती है। रक्षाबंधन के समय भी चीनी उत्पादों की बिक्री अच्छी खासी रही थी।
 
गिफ्ट उत्पादों का आयात करने वाली कंपनी बी प्लास्ट के निदेशक समीर जैन कहते हैं कि चीन से आने वाले सामानों की मांग थोड़ी सुस्त हुई है लेकिन ऐसा जीएसटी की वजह से हुआ है। देशप्रेम की बातें सोशल मीडिया में चलती है और थोक बाजार पर इसका असर नहीं है। बहुत सारे उत्पाद भारत में बनते ही नहीं है, ऐसे में भारतीय कंपनियां भी चीन से माल बनवाती हैं। कॉर्पोरेट घरानों से मांग लगभग पिछले साल के बराबर ही है। चीन के इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के आयातक सुभाष भाई कहते हैं कि हमारे पास विकल्प ही नहीं है, ऐसे में चाइनजी सामान खूब बिकते हैं और यह सस्ता भी होता है। भारतीय कंपनी के जो उत्पाद 1200 रुपये का मिलता है वही सामान चीन का बना हो तो 400 रुपये में मिल जाता है। ऐसे में लोग न चाहते हुए चीनी उत्पाद खरीदते हैं।
कीवर्ड GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक