'नौकरियां गिनने के आंकड़े नहीं'

शुभायन चक्रवर्ती | नई दिल्ली Oct 06, 2017 10:10 PM IST

नौकरियों के सृजन में सुस्ती को लेकर सरकार की चौतरफा आलोचनाओं के बीच औद्योगिक नीति एवं सर्वधन विभाग (डीआईपीपी) के सचिव रमेश अभिषेक ने कहा है कि नौकरियों के सृजन और उसके सही आंकड़े के बारे में पता लगाने के लिए पर्याप्त आंकड़े मौजूद नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इसकी वजह से इस क्षेत्र में वृद्धि के सही आंकड़े जानना मुश्किल है। विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) और भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) की ओर से आयोजित 33वें भारत आर्थिक सम्मेलन की एक परिचर्चा में अभिषेक ने कहा, 'सरकारी के साथ निजी क्षेत्र में भी आंकड़ों का अभाव है, जिसकी वजह से नौकरियों में वृद्धि का आकलन कठिन है। वृद्धि दर के आकलन के लिए श्रम ब्यूरो देश के कुल उद्यमों में से महज 1.74 प्रतिशत उद्यमों से आंकड़े लेता है।'
 
उन्होंने कहा कि  विनिर्माण क्षेत्र के करीब 80 प्रतिशत कर्मचारी कारोबार का अनौपचारिक हिस्सा होते हैं। साथ ही लॉजिस्टिक और रियल एस्टेट में बहुत बड़ी संख्या में नौकरियां मिलती हैं, जिनकी गणना नहीं होती है। अभिषेक ने कहा कि उम्मीद है कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के बाद से इन क्षेत्रों में नौकरियों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी, क्योंकि इसके बाद मूल्य शृंखला औपचारिक स्वरूप लेगा। 
 
वहींं दूसरी ओर यही तर्क दिया जा सकता है कि सरकार ने जो अनुमान लगाया है, उसकी तुलना में वृद्धि दर कम है। दिल्ली के एक वरिष्ठ अर्थशास्त्री ने नाम न दिए जाने की शर्त पर कहा कि ज्यादातर अनौपचारिक अर्थव्यवस्था श्रम ब्यूरो के दायरे से बाहर है, इसलिए वृद्धि के सरकारी अनुमान गलत हो सकते हैं। अनौपचारिक अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में कारोबार श्रम केंद्रित और नकदी पर निर्भर होता है। नोटबंदी और जीएसटी लागू होने के बाद से यह क्षेत्र बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अमिताभ कांत ने भी इस बात की वकालत की कि स्टार्टअप के क्षेत्र में नौकरियों के सृजन की अपार संभावना है। उन्होंने कहा, 'घरेलू स्टार्टअप ने हजारों लोगों को नौकरियां दी है। ओला ने जहां 7 लाख उद्यमी बनाए हैं, वहीं उबर ने 4.5 लाख लोगों को नौकरियां दी है, जिनके पास कार है।'
 
बुनियादी ढांचा विकास के मसले पर सड़क परिवहन एवं राजमार्ग सचिव युधवीर सिंह मलिक ने कहा कि 2017 मेंं देश मेंं 9 से 10 हजार किलोमीटर राजमार्ग बनकर तैयार हो जाएंगे। उन्होंने कहा, 'भारत में हर श्रेणी को मिलाकर कुल 52.5 लाख किलोमीटर सड़कों का संजाल है। तीन साल पहले कुल 91 हजार किलोमीटर या कुल सड़कों का महज 2.1 किलोमीटर सड़कें राजमार्ग थीं। अब राजमार्गों की लंबाई बढ़कर 1.15 लाख किलोमीटर हो गई है।' 
 
सरकार ने देश में कुल 2.5 लाख किलोमीटर राजमार्ग बनाने की योजना बनाई है। रेलवे में भी क्षमता विस्तार की उम्मीद की जा रही है। रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अश्विनी लोहानी ने कहा कि समेकन और विकास साथ साथ चलेगा। उन्होंने कहा, 'देश में यात्री गाडिय़ों की औसत रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे है, जबकि मालगाडिय़ों की रफ्तार 23 किलोमीटर प्रति घंटे है। इसे बदलने की जरूरत है।'  बहरहाल देश भर में लगातार हो रही रेल दुर्घटनाओं के कारण यह मांग हो रही है कि सरकार को मौजूदा बुनियादी ढांचे को दुरुस्त करने की जरूरत है। लोहानी ने इस बात पर जोर देकर कहा, 'हम रोजाना 23,000 रेल चलाते हैं, जिसमें 110 करोड़ टन माल ढुलाई होती है और 1.5 करोड़ लोग यात्रा करते हैं। इनकी व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए लगातार काम हो रहा है।' 
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