क्या बेनामी कानून का पिछली तारीख से लागू होगा: अदालत

भाषा | नई दिल्ली Oct 11, 2017 10:26 PM IST

दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को आयकर विभाग से पूछा है कि क्या वह नए बेनामी कानून के प्रभावी होने के बाद 2016 से पहले किए गए समायोजन प्रविष्टियों (एकमोडेशन एंट्रीज) की जांच करना चाहता है। किसी व्यक्ति या कंपनी द्वारा बेहिसाबी धन को बिना किसी कर का भुगतान किए कारोबार में वापस लाने की प्रक्रिया को समायोजन प्रविष्टि कहा जाता है।
 
न्यायमूर्ति विभु बाखरू ने कहा कि यदि आयकर विभाग संशोधित बेनामी कानून की व्याख्या इस तरीके से करता है, तो इसका प्रभाव पिछली तारीख 1988 से पड़ेगा। यह कानून पहली बार 1988 में अमल में लाया गया था और आयकर विभाग के ऐसा करने से 20-30 साल पुराने मामले फिर खुल सकेंगे। इनमें से कई मामले तो उच्चतम न्यायालय तक पहुंच चुके हैं। न्यायालय ने कर विभाग को कहा, आपको इस बाबत अपना पक्ष साफ करना होगा कि इस कानून पर किस तरह से अमल किया जाएगा। अदालत ने कहा कि इस मुद्दे से काफी जटिलताएं आएंगी। न्यायालय में दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सतेंद्र जैन की अपील पर सुनवाई के दौरान कर विभाग से यह पूछा गया। जैन ने उनसे कथित तौर पर जुड़ी कुछ संपत्तियों को जब्त करने के खिलाफ अपील की थी।
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