पैकेज से ज्यादा जरूरी है राजकोषीय मजबूती

संजीव मुखर्जी और इंदिवजल धस्माना | नई दिल्ली Oct 11, 2017 10:08 PM IST

वित्तीय पैकेज के खिलाफ सलाहकार परिषद

आईएमएफ के अनुमान को किया खारिज
विकास दर और रोजगार बढ़ाने के लिए करेगी सिफारिश

अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए उद्योग को वित्तीय पैकेज की मांग जोर पकड़ रही है लेकिन प्रधानमंत्री की नवगठित आर्थिक सलाहकार परिषद इसके पक्ष में नहीं है। उसका मानना है कि राजकोषीय मजबूती के लिए किए जा रहे उपाय जारी रहने चाहिए। परिषद के सदस्यों के बीच इस बात पर भी सहमति है कि विकास दर में गिरावट आई है लेकिन वे मानते हैं कि वृद्धि के कुछ संकेत दिखने लगे हैं जो आने वाले महीनों में और स्पष्ट हो जाएंगे।

परिषद ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के मौजूदा वित्त वर्ष के लिए भारत के आर्थिक वृद्धि के अनुमान को 7.2 फीसदी से घटाकर 6.7 फीसदी करने के फैसले को खारिज कर दिया। परिषद की पहली बैठक के बाद इसके अध्यक्ष विवेक देवरॉय ने संवाददाताओं से कहा कि राजकोषीय घाटे के लक्ष्यों को बनाए रखने को लेकर बैठक में सहमति थी कि राजकोषीय मजबूती के लिए किए जा रहे उपाय जारी रहने चाहिए।

वित्त वर्ष के पहले 5 महीनों में ही केंद्र का राजकोषीय घाटा बजट अनुमान के 96 फीसदी को पार कर गया है जो पिछले साल इस दौरान 76 फीसदी था। यह स्थिति तब है जबकि सरकार ने अगस्त के लिए पूंजीगत खर्च में भारी कटौती की है। अगर सरकार राजकोषीय घाटे को 3.2 फीसदी बनाए रखने के अपने लक्ष्य से नहीं हटती है तो फिर उसके लिए अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए वित्तीय पैकेज देना असंभव होगा। अगर राज्यों की वित्तीय स्थिति को भी इसमें शामिल कर लिया तो राजकोषीष घाटे की समस्या और भयावह हो जाती है।

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर ऊर्जित पटेल का भी कहना था कि वित्तीय पैकेज के लिए शायद ही कोई गुंजाइश बची है। केंद्र और राज्यों का संयुक्त राजकोषीय घाटा 6 फीसदी के आसपास पहुंच चुका है। वित्तीय पैकेज पर जानकारों की अलग-अलग राय है। नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार का मानना है कि राजकोषीय घाटे से वित्तीय घाटा ज्यादा अहम है। जटिल परिस्थितियों का सामना करने के लिए सरकार के पास साधन होने चाहिए। वित्तीय पैकेज मिले या न मिले लेकिन आर्थिक विकास को गति देने और रोजगार बढ़ाने के बारे में परिषद प्रधानमंत्री को सलाह देगी। परिषद ने अपनी पहली बैठक में आर्थिक विकास, रोजगार सृजन, अनौपचारिक क्षेत्र, राजकोषीय ढांचा, मौद्रिक नीति, सार्वजनिक खर्च सहित 10 क्षेत्रों की पहचान की है। परिषद की रिपोर्ट इन्हीं क्षेत्रों पर आधारित होगी। विभिन्न मंत्रालयों, राज्यों, विशेषज्ञों, संस्थानों, निजी क्षेत्र और दूसरे संबंधित अंशधारकों से सलाह मशविरा करने के बाद रिपोर्ट तैयार की जाएगी। 

देश के बढ़ रही बेरोजगारी के बारे में पूछने पर देवरॉय ने कहा, 'हमारे पास रोजगार को लेकर ठोस आंकड़ा नहीं है। देश में जो भी आंकड़े हैं, वे परिवारों के बीच किए गए सर्वेक्षण पर आधारित हैं और जो आंकड़े हैं भी, वे पुराने हैं। भारत जैसे देश में उपक्रम आधारित आंकड़ा मुश्किल है।' पीएमआई के विनिर्माण, सेवा और प्रमुख क्षेत्रों से जुड़े आंकड़ों में कुछ सुधार दिख रहा है लेकिन औद्योगिक उत्पादन के आंकड़े गुरुवार को आएंगे।

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