जीएसटी में आ सकता है रियल एस्टेट

दिलाशा सेठ | नई दिल्ली Oct 12, 2017 10:12 PM IST

रियल एस्टेट को जल्द ही वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में लाया जा सकता है, जिसे कर चोरी के लिए मुफीद क्षेत्र माना जाता है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को कहा कि इस मसले पर 10 नवंबर को गुवाहाटी में जीएसटी परिषद की प्रस्तावित बैठक में चर्चा होगी। जेटली ने भारत की कर व्यवस्था को कम प्रभावी करार देते हुए कहा कि यहां कर का आधार बहुत छोटा है। जेटली ने संकेत दिए कि भविष्य में कार खरीदने या अंतरराष्ट्रीय हवाई टिकट खरीदने पर विशिष्ट पहचान पत्र (यूआईडी) मांगा जा सकता है। 

हार्वर्ड विश्वविद्यालय में भारत के कर सुधारों पर व्याख्यान में जेटली ने कहा कि इस कदम से उपभोक्ताओं को लाभ होगा, जिन्हें पूरे उत्पाद पर 'अंतिम कर' का भुगतान करते हैं। जीएसटी 1 जुलाई से लागू किया गया था। पेट्रोलियम, रियल एस्टेट, शराब के अलावा कुछ अन्य सामान जीएसटी के दायरे से अभी बाहर हैं। जेटली ने कहा, 'भारत में एक सेक्टर ऐसा है, जहां बड़ी मात्रा में कर चोरी होती है और नकदी का सृजन होता है, वह रियल एस्टेट है। अभी यह जीएसटी से बाहर है। कुछ राज्य इसके लिए दबाव डाल रहे हैं। मेरा व्यक्तिगत रूप से मानना है कि रियल एस्टेट को जीएसटी के दायरे में लाए जाने का मजबूत मामला बनता है।' स्टांप शुल्क जीएसटी के दायरे से बाहर है। रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए इसका कर ढांचा जटिल है। तमाम राज्यों ने स्टांप शुल्क को जीएसटी के दायरे में लाए जाने का विरोध किया है, जो उनके लिए राजस्व का बड़ा स्रोत है। उन्होंने कहा, 'कुछ राज्य चाहते हैं, कुछ नहीं चाहते। इसे लेकर दो विचार हैं। ऐसे में चर्चा के माध्यम से हम एकमत होने की कोशिश करेंगे।'

कॉम्पलेक्स, भवन, सिविल ढांचे के निर्माण पर 12 प्रतिशत जीएसटी लगाया गया है, जिससे खरीदार को पूरी तरह या आंशिक रूप से बेचा जाता है। बहरहाल जमीन और अन्य अचल संपत्ति को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया है। जेटली ने कहा कि अगर रियल एस्टेट को जीएसटी के दायरे से के अंदर लाया जाता है तो पूरे उत्पाद पर भुगतान किया गया अंतिम कर बहुत मामूली होगा। जेटली इस समय एक हफ्ते के अमेरिका दौरे पर हैं। इस दौरान वह आईएमएफ और विश्व बैंक की बैठक में हिस्सा लेंगे। इसके पहले वित्त मंत्री ने कहा था कि रियल एस्टेट को जीएसटी के दायरे में लाना, पेट्रोलियम की तुलना में आसान है। जेटली ने कहा कि भविष्य में कर भुगतान के मामले में जीवन शैली और व्यय के बीच संबंध होगा। 

जेटली ने कहा कि ऐतिहासिक रूप से हम कर व्यवस्था के मामले में विश्व के किसी भी देश की तुलना में कम प्रभावी या सुस्त रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक न्यायिक राय न्यायाधीशों ने दी थी, जिसमें राज्य के राजस्व के हितों की बात कही गई थी और कहा गया था कि इस मामले में निजता का अधिकार अपवाद है। ऐसे में अगर आप कार खरीदने जाते हैं तो आपको यूआईडी देना पड़ सकता है, अगर आप अंतरराष्ट्रीय हवाई टिकट बुक करते हैं तो आपको यूआईडी नंबर देना पड़ सकता है। 

उन्होंने कहा, 'स्वाभाविक रूप से आप हर साल 1.2 से 1.5 करोड़ कारें खरीदते हैं। हर साल आपमें से 2 करोड़ लोग विदेश यात्रा करते हैं। और अगर आप इससे तुलना करें तो व्यय के आंकड़े का आधार बहुत संकरा हो जाता है।' उन्होंने कहा कि जीएसटी को देखेंं तो पहले महीने में सिर्फ 55 लाख लोगों ने रिटर्न दाखिल किया और 40 प्रतिशत लोगों ने कोई कर नहीं दिया। उन्होंने कहा, 'इस तरह से देखेंं तो अब भी कर भुगतान की आदत नहीं है, भले ही वह बहुत मामूली हो।' 

नोटबंदी के बारे में जेटली ने कहा कि यह 'बुनियादी सुधार' है, जो भारत को एक और अधिक कर चुकाने वाले समाज के तौर पर बदलने के लिए जरुरूरी था। उन्होंने कहा कि यदि आप इसके दीर्घकालिक प्रभाव को देखें तो नोटबंदी से डिजिटल लेनदेन बढ़ा और यह मुद्दा विमर्श के केंद्र में आया। इसने व्यक्तिगत कर आधार को बढ़ाया है। इसने नकद मुद्रा को तीन प्रतिशत तक कम किया जो बाजार में चलन में थी। जेटली ने कहा, जिन कदमों के दीर्घावधि लक्ष्य होते हैं, इस बात में कोई शक नहीं कि उसमें लघु अवधि की चुनौतियां होंगी ही, लेकिन यह भारत को एक गैर-कर चुकाने वाले देश से अधिक कर अनुपालक समाज बनाने के लिए आवश्यक था। 
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