सितंबर में 25 प्रतिशत बढ़ा निर्यात

शुभायन चक्रवर्ती | नई दिल्ली Oct 13, 2017 09:45 PM IST

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की चिंता के बीच देश के निर्यात की वृद्धि दर सितंबर महीने में 6 महीने के उच्चचम स्तर 25.7 प्रतिशत पर रही। यह दूसरा महीना है, जब निर्यात वृद्धि दर दो अंकों में रही है। जीएसटी लागू होने के 3 महीने बाद निर्यात में वृद्धि मुख्य रूप से कच्चे तेल के वैश्विक  दाम में बढ़ोतरी की वजह से हुई है। इसकी वजह से प्रसंस्कृत पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात करीब 40 प्रतिशत बढ़ा है, इसके अलावा निर्यात के प्रमुख सामानों में इंजीनियरिंग के सामान और रत्न एवं आभूषण विदेशी मुद्रा की कमाई के मुख्य स्रोत हैं। वहीं दूसरी ओर आयात की वृद्धि दर में गिरावट आई है। सितंबर में निर्यात वृद्धि अगस्त के 21 प्रतिशत की तुलना में घटकर 18 प्रतिशत रह गई। देश में करीब 37.59 अरब डॉलर का सामान भारत आया। 
 
इसकी वजह से व्यापार घाटा सितंबर महीने में 8.98 अरब डॉलर रहा, जो अगस्त में 11.64 अरब डॉलर था। सितंबर 2016 में कारोबारी घाटा 9.07 अरब डॉलर था। इसकी वजह से दूसरी तिमाही में चालू खाता घाटा (सीएडी) कम हो सकता है। इक्रा में मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर को उम्मीद है कि सीएडी दूसरी तिमाही में घटकर 7.5 से 8.5 अरब डॉलर रह जाएगा, जो पहली तिमाही मेंं 14 अरब डॉलर था। अगस्त महीने में सोने के आयात में करीब 69 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई थी, जो सितंबर में 5 प्रतिशत घटकर 1.7 अरब डॉलर रह गया है। बहरहाल चांदी के आयात में तेजी जारी है और इसमें 128 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। 
 
गैर तेल और गैर स्वर्ण आयात 19.76 प्रतिशत बढ़ा है, जो अगस्त महीने के 20 प्रतिशत से मामूली कम है। इससे औद्योगिक क्षेत्र की वृद्धि दर लगातार दूसरे महीने बेहतर रहने की उम्मीद है। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) अगस्त मेंं 4.2 प्रतिशत बढ़ा है, जो जुलाई की तुलना में कमोबेश बराबर है। चालू भाव पर गैर तेल और गैर स्वर्ण आयात और स्थिर मूल्य पर आईआईपी औद्योगिक वस्तुओं की मां में बढ़ोतरी के संकेत देते हैं। 
 
निर्यात मं लगातार 13वें महीने में बढ़ोतरी हुई है। देश से सितंबर महीने में 28.61 अरब डॉलर के सामान का निर्यात हुआ है, जो पिछले साल की समान अवधि में 22.76 अरब डॉलर था। गैर तेल निर्यात सितंबर महीने में 23.88 प्रतिशत बढ़ा है, जो अगस्त के 6.86 प्रतिशत से ज्यादा है।  नायर ने कहा, 'वस्तुओं के निर्यात में लगातार सुधार और इसकी व्यापक प्रवृत्ति से पता चलता है कि जीएसटी को लेकर जो चिंता हो रही थी वह कुछ क्षेत्रों में कम हुई है। कुछ बड़े निर्यात समूहों ने रिकॉर्ड वृद्धि दर हासिल की है, जो जिंस के दाम मेंं बढ़ोतरी की वजह से हो सकती है।' 
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