जमीन-मकान पर जीएसटी नहीं इतना आसान

दिलाशा सेठ और इंदिवजल धस्माना | नई दिल्ली Oct 15, 2017 10:53 PM IST

वस्तु की परिभाषा में अचल संपत्ति का जिक्र नहीं

► जीएसटी में जमीन को लाने के लिए परिभाषा में करना होगा बदलाव
स्टांप शुल्क और रजिस्ट्री राज्यों का मामला
राज्यों की सहमति के साथ ही संविधान संशोधन की भी होगी जरूरत
राज्य आसानी से स्टांप शुल्क पर अपना अधिकार गंवाना नहीं चाहेंगे
जीएसटी परिषद की अगली बैठक में होगा इस पर विचार

रियल एस्टेट को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में लाने के लिए उम्मीद से कहीं ज्यादा वक्त लग सकता है। हालांकि अगले महीने गुवाहाटी में होने वाली बैठक में राज्यों के वित्त मंत्री इस पर चर्चा करेंगे। जीएसटी परिषद से जुड़े एक सूत्र ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि बैठक में इस बात पर चर्चा होगी कि नए अप्रत्यक्ष कर के दायरे में केवल जमीन लाई जाए या स्टांप शुल्क को भी इसमें शामिल किया जाए। इसके अलावा इस पर भी विचार किया जा सकता है कि इन दोनों को जीएसटी के तहत लाने के लिए संविधान संशोधन की जरूरत है या केवल संबंधित कानूनों में बदलाव के जरिये ऐसा किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि इसके लिए संशोधन की जरूरत पड़ सकती है क्योंकि संविधान में वस्तु की जो परिभाषा दी गई है, उसमें अचल संपत्ति को शामिल नहीं किया गया है। 'वस्तुओं' को वस्तु बिक्री अधिनियम, 1930 के तहत परिभाषित किया गया है, जिसमें शेयर, फसल आदि सहित सभी तरह की चल संपत्ति शामिल हैं। ऐसे में जीएसटी के तहत जमीन पर वस्तु संबंधी कर लगाने के लिए इसकी परिभाषा को बदलना होगा। इसके साथ ही स्टांप शुल्क एवं संपत्ति का रजिस्ट्री शुल्क राज्य के अधिकार क्षेत्र में आता है और अगर इसे भी जीएसटी में शामिल किया जाता है तो संविधान में संशोधन करना होगा।

एक अन्य सूत्र ने बताया, 'हम अध्ययन कर रहे हैं कि स्टांप शुल्क को जीएसटी के लाने के लिए संविधान में संशोधन की जरूरत होगी या नहीं।' संपत्ति पर स्टांप शुल्क का नियमन केंद्रीय कानून - भारतीय स्टांप शुल्क अधिनियम, 1899 के तहत होता है और इस कर का संग्रह राज्यों द्वारा किया जाता है। राज्यों के पास इस संबंध में अपने हिसाब से नियम बनाने और अधिनियम में संशोधन करने का संवैधानिक अधिकार है।

फिलहाल विभिन्न राज्यों में स्टांप शुल्क की दर अलग-अलग (3 से 10 फीसदी तक) है। कुछ राज्यों में तो अलग-अलग इलाके में भी यह दर अलग-अलग है। उदाहरण के तौर पर महाराष्टï्र में बंबई स्टांप अधिनियम, 1958 के तहत स्टांप शुल्क वसूला और संपत्ति की रजिस्ट्री कराई जाती है। अन्य राज्यों जैसे गुजरात, कर्नाटक, केरल, राजस्थान और तमिलनाडु के अपने अलग स्टांप शुल्क कानून है।

कानूनों में संशोधन के अलावा संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई मतों के साथ संविधान संशोधन की जरूरत होगी। मतभेद होने की स्थिति में सदन की संयुक्त बैठक का प्रावधान नहीं होगा। इसके साथ ही इस मामले में खासकर स्टांप शुल्क अधिनियम में संशोधन के लिए कम से कम आधे राज्यों में उसे पारित कराना होगा। खेतान ऐंड कंपनी के अभिषेक रस्तोगी ने कहा कि संपत्ति पर स्टांप शुल्क को जीएसटी में लाने के लिए संविधान संशोधन की जरूरत पड़ सकती है क्योंकि यह राज्यों का मामला है। हालांकि एक विकल्प यह भी है कि राज्यों द्वारा स्टांप शुल्क को शून्य घोषित कर दिया जाए और इसे जीएसटी के तहत लाने पर सहमति हो जाए। लेकिन उन्होंने कहा कि राज्य ऐसा क्यों करेंगे? उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति में स्टांप शुल्क को जीएसटी में शामिल करना अव्यावहारिक लगता है। सूत्रों ने कहा कि रियल एस्टेट को जीएसटी में लाने के सभी पहलुओं पर विचार किया जाएगा। 

वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि इसके कई पहलू हैं। उदाहरण के तौर पर ग्राहकों की आकांक्षा है कि रियल एस्टेट को जीएसटी में शामिल किया जाए और स्टांप शुल्क एवं रजिस्ट्रेशन को भी इसके दायरे में लाया जाए। उन्होंने कहा, 'क्या राज्य ऐसा करने को इच्छुक होंगे? इससे राज्यों को आय प्राप्त होती है। ऐसे में क्या राज्य इसे गंवाना चाहेंगे?' एक अन्य विकल्प यह हो सकता है कि स्टांप शुल्क इसमें लाए बिना, जमीन और मकान दोनों के लिए अलग जीएसटी बना दिया जाए। उन्होंने कहा, 'लेकिन यह ग्राहकों के लिए एक अतिरिक्त विकल्प होगा।'

परिषद शुरुआत में इन मसलों पर चर्चा करेगा। उन्होंने कहा, 'लेकिन इसमें कई और पहलू हैं, जो सामने आ सकते हैं। यह एक बड़ा मसला है।' डेलॉयट के एमएस मैनी ने कहा, 'संपूर्ण रियल एस्टेट क्षेत्र को जीएसटी के तहत लाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच व्यापक सहमति बनाने की जरूरत है।' इसके बाद विधायी प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। उन्होंने कहा, 'विभिन्न राज्यों में अलग-अलग स्टांप शुल्क और पंजीकरण शुल्क को जीएसटी के दायरे में लाना इसका मुख्य ध्येय होगा।'

फिलहाल पेट्रोलियम, अल्कोहल और रियल एस्टेट को जीएसटी से बाहर रखा गया है। हालांकि निर्माणाधीन मकान में ठेके के काम को जीएसटी के तहत लाया गया है, जबकि स्टांप शुल्क और जमीन इससे बाहर हैं। भारत उन गिने-चुने देशों में है जहां निर्माणाधीन मकानों की बिक्री चलन में है। आमतौर पर दुनिया के ज्यादातर हिस्सों मकान बनाने के बाद उसकी बिक्री की जाती है। रस्तोगी ने कहा कि जीएसटी परिषद को रियल एस्टेट को जीएसटी के दायरे में लाने की अड़चनों को तत्काल दूर करनी चाहिए। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में हाल ही में कहा था, 'रियल एस्टेट ऐसा क्षेत्र है, जहां काफी मात्रा में कर चोरी और नकद कारोबार होता है, वह अभी भी जीएसटी से बाहर है। कुछ राज्य इसे जीएसटी में लाना चाहते हैं, कुछ नहीं चाहते हैं। ऐसे में हम विचार-विमर्श कर एक राय बनाने की कोशिश करेंगे।' जीएसटी परिषद की अगली बैठक 10 नवंबर को गुवाहाटी में होगी।
कीवर्ड जीएसटी, जमीन, स्टांप शुल्क, रजिस्ट्री, संविधान संशोधन, रियल एस्टेट,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक