सूरत के कपड़ा कारोबारियों की बिगड़ी दीवाली

विनय उमरजी | अहमदाबाद Oct 20, 2017 09:34 PM IST

सरकार द्वारा 6 अक्टूबर को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) दरों में बदलाव सूरत के कपड़ा कारोबारियों के लिए देरी से आया। कारोबारियों का कहना है कि दीवाली के एक पखवाड़े में रोजाना 1,500 ट्रकों पर लदान होता था और 10,000 से 12,000 करोड़ रुपये का कारोबार होता था, लेकिन इस दीवाली कारोबार घटकर 15-20 प्रतिशत रह गया। त्योहार के बाद काम शुरू होने के बाद कारोबारी आगामी बुधवार से हड़ताल पर जाने या न जाने के बारे में फैसला करेंगे। सूरत के एक प्रमुख कपड़ा कारोबारी और जीएसटी संघर्ष समिति से जुड़े ताराचंद कसाट ने बिजनेस स्टैंडर्ड से बातचीत में कहा, 'यह पहला मौका है, जब हम इस तरह की दीवाली देख रहे हैं।' 

 
पिछले कुछ साल से इस दीवाली पखवाड़े में सूरत से रोजाना 1,500 ट्रकों में कपड़े भेजे जाते हैं, जिनमें एक ट्रक परिधान की लागत करीब 60 लाख रुपये होती है। जीएसटी के असर के चलते ऑर्डर इस साल खत्म हो गए, खासकर उत्तर और मध्य भारत के थोक बिक्रेताओं ने कपड़े नहीं मंगाए। एक प्रमुख कारोबारी ने नाम न दिए जाने की शर्त पर बताया, 'सूरत में कम से कम 500 से 800 करोड़ रुपये का भंडार बचा हो सकता है, जो बेकार पड़ा है।'
 
कसाट ने कहा, 'कुल 250 में से 150 टेक्सटाइल बाजार में कारोबारियों ने अपने कार्यालय नहीं सजाए।' पावरलूम उद्योग दीवाली की छुट्टियों की वजह से बंद है और अभी यह निश्चित नहीं है कि कितनी इकाइयां उत्पादन बहाल रख सकेंगी। सूरत के पावरलूम मालिक निखिल गोदीवाला ने कहा, 'तमाम बुनकरों को अभी फैसला करना है। संभव है कि कारीगरों की छुट्टियां बढ़ा दी जाएं।'
 
कसाट ने कहा, 'जीएसटी में 6 अक्टूबर को टेक्सटाइल को लेकर जो बदलाव किया गया है इससे सूरत के सिंथेटिक टेक्सटाइल बाजार के मसलों का समाधान नहीं हुआ है। इस दीवाली में महज 15 से 20 प्रतिशत कारोबार हुआ है। यह सबसे खराब दीवाली सीजन रहा है। बाजार खुलने के बाद से हम फैसला करेंगे कि हड़ताल करना है या नहीं।' 50,000 करोड़ रुपये के कारोबार वाले सूरत के सिंथेटिक टेक्सटाइल केंद्र में 6,50,000 पावरलूम, 2,00 से ज्यादा थोक टेक्सटाइल बाजार, 20,000 विनिर्माता, 75,000 कारोबारी, 450 प्रसंस्करण इकाइयां और 50,000 से 60,000 एंब्राइडरी मशीनें है। जीएसटी लागू होने के पहले तीन महीने में सूरत में सिंथेटिक  फैब्रिक उत्पादन 4 करोड़ मीटर रोजाना से गिरकर 2 से 2.5 करोड़ मीटर रोजाना रह गया। 
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