कंपोजिशन स्कीम में मिलेगी राहत!

दिलाशा सेठ | नई दिल्ली Oct 23, 2017 10:46 PM IST

... मिलेगी राहत

समिति छोटे-मझोले उद्यमियों से करेगी बात
गुवाहाटी में परिषद लगा सकती है मुहर
अंतरराज्यीय आपूर्ति आ सकती है इसके दायरे में
मिल सकता है इनपुट टैक्स क्रेडिट
मंत्रियों की समिति करेगी बदलाव
छोटे उद्यमों का रखा जाएगा ध्यान

सरकार वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत छोटे कारोबारियों के लिए शुरू की गई कंपोजिशन स्कीम को ज्यादा आकर्षक बनाने की तैयारी में है। इसमें अंतरराज्यीय आपूर्ति को भी शामिल किया जा सकता है। साथ ही इसके कारोबारियों को इनपुट टैक्स क्रेडिट की सुविधा दी जा सकती है। असम के वित्त मंत्री हेमंत विश्व शर्मा की अगुआई वाली मंत्रियों की समिति रविवार की बैठक में कंपोजिशन स्कीम में बदलाव को अंतिम रूप दे सकती है। समिति छोटे और मझोले उद्योग के नुमाइंदों से बात करेगी और इस योजना में सुधार के लिए उनकी राय जानेगी। 

समिति की यह दूसरी बैठक होगी। इससे पहले की बैठक में समिति ने रेस्टोरेंट के लिए कर की दर 18 से घटाकर 12 फीसदी करने का फैसला लिया था। साथ ही इनपुट टैक्स क्रेडिट की सुविधा भी वापस ले ली थी। इस फैसले को 10 नवंबर को गुवाहाटी में जीएसटी परिषद की बैठक में रखा जाएगा। समिति के सदस्य ने कहा कि बैठक में इस बात पर आम राय थी कि छोटे और मझोले उद्यमों के लिए जीएसटी के तहत अनुपालन का बोझ कम करने की जरूरत है। अब हम कंपोजिशन योजना का दायरा बढ़ाने पर विचार करेंगे। इसमें सामान की एक से दूसरे राज्य में आपूर्ति को शामिल किया जा सकता है। इस क्षेत्र की यह एक प्रमुख मांग है। उन्होंने कहा कि इनपुट टैक्स क्रेडिट की सुविधा भी कंपोजिशन योजना के तहत दी जा सकती है जिससे कि छोटे व्यापारियों के लिए इसका विकल्प अपनाना आसान हो। कई छोटे कारोबारी कंपोजिशन योजना अपनाने से हिचक रहे हैं। उनका मानना है कि बड़ी कंपनियां उनसे खरीद बंद कर सकती है। इसे ठीक करने की जरूरत है। 

लघु एवं मझोले उद्योगों के मंत्रालय से कहा गया है कि वह उद्योग के नुमाइंदों से बात कर उनकी मांग को समझे। इस समिति में बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी के अलावा जम्मू कश्मीर के वित्त मंत्री हसीब द्राबू, पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल और छत्तीसगढ़ के वाणिज्य कर मंत्री अमर अग्रवाल शामिल हैं।

समिति यह देखेगी कि क्या कंपोजिशन योजना के तहत कर लगाने के लिए निर्धारित कुल कारोबार की सीमा में से छूट वाले सामान को बाहर किया जा सकता है। जीएसटी परिषद की पिछली बैठक में कंपोजिशन स्कीम की पात्रता सीमा मौजूदा 75 लाख रुपये से बढ़ाकर एक करोड़ रुपये की गई थी। इस योजना में कर की एक समान दर है और हर तीन महीने में रिटर्न भरना होता है। योजना के तहत रिटर्न भरने की तारीख बढ़ाकर 31 मार्च कर दी गई है। 

इस योजना के तहत पंजीकृत कारोबारी इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा नहीं कर सकता। ऐसा डीलर टैक्स इनवॉयस जारी नहीं कर सकता। इसलिए कंपोजिशन योजना में पंजीकृत किसी डीलर से अगर आप कोई सामान खरीदते हैं तो खरीदे गए सामान पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा नहीं किया जा सकता। साथ ही योजना का विकल्प चुनने पर दूसरे राज्य में आपूर्ति भी नहीं की जा सकती। कंपोजिशन डीलर को हर तीन महीने में जीएसटीआर-4 रिटर्न और हर साल जीएसटीआर-9ए भरना होता है जबकि सामान्य करदाता को हर महीने तीन फॉर्म दाखिल करने होते हैं। इसके अलावा बिल के अनुसार ब्योरा अपने रिटर्न में दाखिल करने की जरूरत नहीं है। यह योजना तंबाकू उत्पादों, पान मसाला और आइसक्रीम निर्माताओं के लिए नहीं है।
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