बजट अनुमान के पार जाएगी विनिवेश रकम

अरूप रॉयचौधरी | नई दिल्ली Oct 24, 2017 09:50 PM IST

वस्तु एवं सेवा कर लागू होने के कारण कर राजस्व में गिरावट की आशंका और अर्थव्यवस्था को सहारा देने एवं रोजगार सृजन के लिए संभावित प्रोत्साहन खर्च के मद्देनजर वित्त मंत्री अरुण जेटली साल 2017-18 के लिए राजकोषीय घाटा लक्ष्य को पाटने के लिए विनिवेश जैसे राजस्व सृजन के प्रमुख स्रोत पर निर्भर रहेंगे। साल 2009-10 के बाद पहली बार ऐसा लगता है कि सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बिक्री से प्राप्त राजस्व 72,500 करोड़ रुपये के राजस्व अनुमान को पार कर जाएगा जो किसी एक वित्त वर्ष के लिए अब तक का सबसे अधिक विनिवेश राजस्व का अनुमान है। अप्रैल से सितंबर के बीच पहली छमाही के दौरान केंद्र सरकार ने विनिवेश के जरिये 19,759 करोड़ रुपये जुटाए। अब सरकारी कंपनी ओएनजीसी द्वारा हिंदुस्तान पेट्रोलियम के अधिग्रहण की तैयारी चल रही है जिससे सरकारी खजाने को 30,000 करोड़ रुपये से अधिक की राजस्व प्राप्ति होगी। उसके बाद तमाम कंपनियों के लिए आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ), ऑफर फॉर सेल (ओएफएस), एक नया एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) और इक्विटी पुनर्खरीद की योजना बनाई गई है।
 
भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के मुख्य अर्थशास्त्री सौम्य कांति घोष ने सोमवार को अपने एक क्लाइंट नोट में लिखा है, 'हमारे आकलन के अनुसार राजस्व प्राप्तियों में 1.1 लाख करोड़ रुपये की गिरावट आ सकती है। हालांकि अच्छी खबर यह है कि विनिवेश से 72,500 करोड़ रुपये जुटाने के बजटीय अनुमान तक पहुंचने के लिए कार्य प्रगति पर है। मौजूदा प्रवृत्ति को देखते हुए लगता है कि वित्त वर्ष 2010 के बाद पहली बार विनिवेश लक्ष्य को हासिल कर लिया जाएगा।'
 
केंद्र सरकार इसी महीने जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन के आईपीओ के साथ पूंजी बाजार में उतरी थी। यह 11,300 करोड़ रुपये पर पिछले सात साल का सबसे बड़ा आईपीओ रहा। इस साल आईपीओ की योजना बनाने वाली एक अन्य बीमा कंपनी न्यू इंडिया एश्योरेंस है जो इसके जरिये 10,000 करोड़ रुपये जुटा सकती है। वित्त मंत्री के निवेश एवं सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) भी आईआरसीटीसी, आईआरएफसी, इरकॉन, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स, गार्डन रीच शिपबिल्डर्स, भारत डायनामिक्स और मझगांव डॉकयार्ड जैसी तमाम कंपनियों के लिए रक्षा एवं रेल मंत्रालय के साथ मिलकर योजना बना रहा है। सूत्रों ने बताया कि दीपम दूसरी छमाही के लिए जिन कंपनियों में ओएफएस प्रस्ताव पर काम कर रहा है उनमें एनएचपीसी, पावर फाइनैंस कॉरपोरेशन (पीएफसी) और स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया में 10 फीसदी हिस्सेदारी बिक्री, एनएलसी मेंं 15 फीसदी , रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉरपोरेशन (आरईसी) में 5 फीसदी हिस्सेदारी और इंडियन ऑयल में 3 फीसदी हिस्सेदारी बिक्री पर विचार किया जा रहा है। अगस्त सरकार ने एनटीपीसी में 7 फीसदी हिस्सेदारी की बिक्री की थी।
कीवर्ड GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक