ट्रंप के शासन में पहली बार होगी कारोबारी बात

शुभायन चक्रवर्ती | नई दिल्ली Oct 24, 2017 09:53 PM IST

अमेरिका में डॉनल्ड ट्रंप के सत्ता में आने के बाद से भारत और अमेकिा के बीच पहली बार मंत्रिस्तरीय कारोबारी बातचीत होने जा रही है, जिसमें समग्र समझौते, एच-1बी वीजा के लिए ज्यादा शुल्क जैसे मसले उठेंगे। यह बातचीत गुरुवार से शुरू हो रही वाणिज्य और उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु की दो दिवसीय यात्रा के दौरान होगी। वाणिज्य विभाग के एक अधिकारी ने नाम न दिए जाने की शर्त पर कहा कि उम्मीद की जा रही है कि सुरेश प्रभु अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि रॉबर्ट लाइटहाइजर और अमेरिकी वाणिज्य मंत्री विल्बर रॉस के साथ बैठक करेंगे। 
 
यह वार्ता ऐसे समय में होने जा रही है जब अमेरिका के विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन  नई दिल्ली पहुंच रहे हैं, जिससे द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी को मजबूती दी जा सके। इस समय दोनों देशों के बीच कारोबार 100 अरब डॉलर (करीब 66.7 लाख करोड़ रुपये) के करीब है, जिसमें वाणिज्यिक कारोबार 64.51 अरब डॉलर (4.14 लाख करोड़ रुपये) है। आने वाले वर्षों में कारोबार बढ़ाकर 500 अरब डॉलर करने के लिए दोनों पक्ष सहमत हुए हैं। यह बैठक कारोबार व निवेश पर बातचीत के लिए बने एक दशक पुराने ट्रेड पॉलिसी फोरम के तहत होगी। लेकिन भारत चाहता है कि 3 साल पुरानी रणनीतिक और वाणिज्यिक वार्ता के साथ मिलाकर बातचीत हो। उपरोक्त उल्लिखित अधिकारी ने कहा कि इस साल की शुरुआत में जनवरी में कार्यभार संभालने वाले ट्रंप प्रशासन ने बातचीत के अलग प्रारूप क ा सुझाव दिया था।
 
समग्र समझौता भारत की प्राथमिकता
 
भारत का जोर समग्र समझौते (टोटलाइजेशन एग्रीमेंट) पर है, जिसमें अमेरिका में भारत के अस्थायी कर्मचारियों के देश छोडऩे के बाद सामाजिक सुरक्षा में हिस्सेदारी को अनुमति देना शामिल होगा। जुलाई 2015 में अपनी सालाना बैठक मेंं भारत ने अमेरिका के टोटलाइजेशन ऐंड सोशल सिक्योरिटी ऐक्ट को लेकर चर्चा के लिए उच्च स्तरीय समिति बनाने पर जोर दिया था।
 
भारत के मुताबिक यह कानून अमेरिका में भारत के कर्मचारियों को लेकर विभेद करता है और कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा में हिस्सेदारी से वंचित करता है। भारत इस मसले का जल्द समाधान चाहता है, जिसका लक्ष्य भारत के पेशेवरों के हितों की रक्षा करना है, जो अमेरिका की सामाजिक सुरक्षा मेंं हर साल 1 अरब डॉलर (6,670 करोड़ रुपये)का योगदान करते हैं। इस समझौते के तहत दोनों देशों के पेशेवरों को सामाजिक सुरक्षा कर से छूट मिलेगी, जब वे कम अवधि के लिए दूसरे देश में काम करने जाएंगे। 
 
अमेरिका के लिए टिकट कम करना
 
वीजा शुल्क में बढ़ोतरी और एच-1बी और एल-1 वीजा की संख्या कम किए जाने को लेकर भी चर्चा होगी। भारत का दावा है कि इससे भारत के सूचना तकनीक उद्योग पर असर पड़ेगा, अमेरिका की पूर्व वाणिज्य मंत्री पेनी प्रित्जकर ने दावा किया था कि इस तरह का अधिसंख्य वीजा भारतीयों को दिया गया है। उन्होंने कहा था, '2014-15 में कुल एच1-बी वीजा में से 69 प्रतिशत और एल-1 वीजा में से 30 प्रतिशत भारतीयोंं को जारी किए गए।' अमेरिकी अर्थव्यवस्था में भारत की कंपनियों की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। अमेरिका में 2015 में भारत का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश बढ़कर 11.8 अरब डॉलर हो गया।
 
अन्य प्रमुख मसले
 
विभाग के एक अन्य अधिकारी ने कहा कि भारत अमेरिका द्विपक्षीय निवेश समझौते  में कुछ नीतिगत मतभेदों पर भी चर्चा हो सकती है। बहरहाल अमेरिका भारत रणनीतिक और भागीदारी मंच के वाइस चेयरमैन एडवर्ड मोनसर ने हाल में कहा था कि उन्हें नहीं लगता कि इस तरह के मसले उच्च स्तर की प्राथमिकता में हैं। एक अन्य मसला बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) को लेकर है, जो लंबे समय से चल रहा है। भारत लगातार कह रहा है कि उसका आईपीआर कानून वैश्विक और विश्व व्यापार संगठन के मानकों के अनुरूप है, वहीं अमेरिका ने खासकर दवा क्षेत्र में पेटेंट को लेकर चिंता जताई है। कारोबारी गोपनीयता को लेकर अमेरिका अलग से कानून चाहता है। वीजा नियमन, सीमा शुल्क को लेकर सहयोग, वस्तुओं के लिए बाजार की पहुंच बढ़ाने और बौद्धिक संपदा ऐसे मसले हैं, जिन पर चर्चा की संभावना है। 
कीवर्ड india, america, suresh prabhu,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक