निर्यातकों के लिए ई-वॉलेट जल्द

दिलाशा सेठ |  Oct 29, 2017 09:41 PM IST

नैशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) और नैशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था के तहत निर्यातकों के लिए प्रस्तावित ई-वॉलेट प्रणाली विकसित करने की होड़ में हैं। हालांकि सरकार को नैशनल क्रेडिट सिस्टम विकसित करने वाली एजेंसी के बारे में निर्णय लेना अभी बाकी है। इससे निर्यातकों के लिए कार्यशील पूंजी प्रवाह बढ़ाने में मदद मिलेगी। जीएसटी की बुनियादी माने जाने वाले जीएसटी नेटवर्क (जीएसटीएन) के लिए भी इस पर विचार किया जा रहा है।

 
एक सरकारी अधिकारी ने कहा, 'अभी हमें यह निर्णय लेना बाकी है कि ई-वॉलेट सिस्टम को कौन विकसित करेगा। एनएसडीएल और एनपीसीआई को विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है।' सरकार नकदी रहित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दे रही है और इसके लिए एनपीसीआई ने भारत इंटरफेस फॉर मनी (भीम) ऐप तैयार किया है जिसके तहत देश भर में 55 बैंकों के ग्राहकों के लिए आसान भुगतान सेवा उपलब्ध है। हालांकि एनएसडीएल भारत में सबसे अधिक प्रतिभूतियों को संचालित करने वाली पहली और सबसे बड़ी डिपॉजिटरी है। भारतीय पूंजी बाजार में विमुद्रीकरण से निपटने और रिटर्न फाइलिंग के लिए जीएसटी सुविधा प्रोवाइडर उपलब्ध कराने में उसकी उल्लेखनीय भूमिका रही है।
 
इस बीच, विदेशी व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) इस मुद्दे पर काम कर रहा है कि शुरू में निर्यातकों को कितनी रकम की जरूरत होगी। ई-वॉलेट अनिवार्य तौर पर एक राष्ट्रीय उधारी है और इससे सरकारी खजाने को कोई झटका नहींं लगेगा क्योंकि वह वास्तविक रकम से समर्थित नहीं है। ई-वॉलेट में उपलब्ध क्रेडिट को हस्तांतरित किया जा सकेगा। वास्तव में व्यापारी भी ई-वॉलेट रख सकेंगे और केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी) अथवा एकीकृत जीएसटी (आईजीएसटी) के भुगतान के लिए उधारी में उसका इस्तेमाल कर सकेंगे। राजस्व सचिव हसमुख अढिया ने कहा, 'सरकार को कहीं भी कुछ नहीं रखना पड़ेगा। यह निर्यातकों के डीजीएफटी रिकॉर्ड के साथ सांकेतिक आधार पर होगा।' निर्यातकों के पिछले रिकॉर्ड के आधार पर डीजीएफटी इनपुट की राशि निर्धारित होगी। जिसके आधार पर इनपुट पर किसको कितना कर देना पड़ेगा।
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