वित्त मंत्रालय ने विभागों से मांगी सफाई

अरूप रॉयचौधरी | नई दिल्ली Nov 07, 2017 09:48 PM IST

वित्त मंत्रालय ने उन विभागों से सफाई मांगी है, जिन्होंने आवंटित धनराशि से कम खर्च किया है। वित्त मंत्रालय इस समय बजट पूर्व तैयारी में लगा है और 2017-18 के पुनरीक्षित अनुमानों को विभिन्न मंत्रालयों से चर्चा कर अंतिम रूप दे रहा है। आवंटित धनराशि से कम खर्च करने वाले विभागों को आगामी शीतकालीन सत्र के अनुदानों की पूरक मांग में अतिरिक्त धनराशि मिलने की संभावना कम है और इससे उनका 2018-19 का बजट आवंटन भी प्रभावित हो सकता है। 
 
वरिष्ठ सरकारी सूत्रों से बिजनेस स्टैंडर्ड को मिली जानकारी के मुताबिक कम खर्च करने वाले बड़े मंत्रालयों में संचार व बिजली मंत्रालय प्रमुख हैं। अप्रैल से सितंबर के बीच कुल व्यय 11.5 लाख करोड़ रुपये रहा है, जो पूरे साल के बजट अनुमान 21.46 लाख करोड़ रुपये का करीब 54 प्रतिशत है। वहीं मिल रही सूचना के मुताबिक संचार व बिजली मंत्रालयों ने अपने आवंटन का 40 प्रतिशत से कम खर्च किया है। 
 
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'हमने इन विभागों से स्पष्टीकरण मांगा है कि वे आवंटित धनराशि खर्च करने में सफल क्यों नहीं हुए। उनसे कहा जाएगा कि अनुदान की पूरक मांग करने के पहले वे उस धनराशि को खर्च करें, जो पहले उन्हें आवंटित किया गया था।' अधिकारी ने कहा, 'आवंटित धनराशि के इस्तेमाल के मामले में उनके खराब प्रदर्शन का असर अगले वित्त वर्ष में उनके बजटीय समर्थन पर भी पड़ सकता है, जो कई कारकों पर निर्भर है। हम इन सभी मसलोंं को देख रहे हैं।'
 
वित्त वर्ष 2017-18 में संचार मंत्रालय का कुल व्यय 36,237 करोड़ रुपये जबकि बिजली मंत्रालय का बजट 13,881 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया था।  मध्यावधि व्यय ढांचे वाली परियोजनाओं (एमटीईएफ) में केंद्र सरकार का व्यय 3 साल अग्रिम में चलता है। वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए वित्त मंत्रालय ने सलाह दी है कि विभिन्न विभागोंं में अनुमानित व्यय और असल व्यय मेंं अंतर नहीं होना चाहिए। इस साल के बजट अधिसूचना में कहा गया है कि मंत्रालयों का बजट अनुमान एमटीईएफ स्टेटमेंट के अनुमानों के अनुरूप होना चाहिए और एमटीईएफ अनुमानों से कोई अंतर नहीं आना चाहिए। 
 
ऐसे में अगर कोई विभाग या मंत्रालय आवंटित धनराशि खर्च करने में सफल नहींं रहा है तो आगामी वित्त वर्ष के उसके आवंटन में कमी की जा सकती है। 'आउटपुट आधारित बजट' से 'आउटकम आधारित बजट' में बदलाव होने पर वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने कड़े मानक बनाए हैं। वित्त वर्ष 2018-19 का बजट वित्त मंत्री अरुण जेटली 1 फरवरी को संसद में पेश कर सकते हैं। 
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