जीएसटी दर में कटौती से छोटे कारोबारियों की आस जगी

विनय उमरजी | अहमदाबाद/नई दिल्ली/मुंबई Nov 12, 2017 10:22 PM IST

... राहत की आस

► मुंबई-दिल्ली में चमड़ा और फर्नीचर की बिक्री 10 से 50 फीसदी गिरी
गुजरात के सिरैमिक टाइल इकाइयों में उत्पादन आधा
दरें घटाने के बाद उत्पादन और बिक्री में सुधार की आस

लकड़ी के छोटे बोर्ड बनाने वाले दिल्ली के अहमदुल्ला खान के चेहरे की रंगत उड़ी हुई है। टिंबर मार्केट रोड पर छोटी सी दुकान चलाने वाले खान ने कहा कि त्योहारी मौसम खत्म होने के बाद अब उन्हें अपने कारोबार को फिर से पटरी पर लाना मुश्किल है। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद ने अपने हालिया फैसले में लकड़ी के फर्नीचर, फुटवियर, लगेज, बिजली उपकरणों, सभी तरह की टाइलों और सैनिटरीवेयर पर जीएसटी की दर 28 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी कर दी है। लेकिन खान और अन्य कारोबारी इस बात को लेकर निश्चिंत नहीं हैं कि इसका उन्हें फायदा मिलेगा या नहीं।

पश्चिम दिल्ली के कीर्ति नगर मार्केट में दीवारों और फर्श के लिए वुडन पैनलिंग की दुकान चलाने वाले राधे श्याम बंसल का कहना है कि कर की दर में बदलाव से प्लास्टिक आधारित पीवीसी पैनलिंग की बढ़ती लोकप्रियता को कम नहीं किया जा सकता है। यह लकड़ी का सस्ता और टिकाऊ विकल्प है और धीरे-धीरे उपभोक्ताओं में इसकी स्वीकार्यता बढ़ रही है। चमड़े का सामान, बिजली उपकरणों और सिरैमिक टाइल के कारोबारी शादी के मौसम और कीमतों में गिरावट से कारोबार के फिर से पटरी पर लौटने की उम्मीद कर रहे हैं।

लाजपत नगर में लगेज बैग्स की बड़ी दुकान चलाने वाले कमलेश गुप्ता जीएसटी परिषद के शुक्रवार के फैसले से राहत महसूस कर रहे हैं। कीमतें बढऩे के कारण पिछले 4 महीनों में सूटकेस, ट्रंक और वैनिटी बैगों की बिक्री में 4 से 7 फीसदी की गिरावट आ चुकी है। गुप्ता कहते हैं, 'इस गिरावट ने मुझे चिंता में डाल दिया था। उम्मीद है कि अब सभी निर्माता कंपनियों को कीमतें कम करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। शादी का मौसम दीवाली से छोटा होता है लेकिन जब जागे तभी सवेरा।'

गुजरात का मोरबी दुनिया में टाइल निर्माण का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा केंद्र हैं। इसका सालाना कारोबार 30,000 करोड़ रुपये का है। लेकिन जुलाई से इस कारोबार में 50 फीसदी तक की गिरावट आ चुकी है। 28 फीसदी जीएसटी से न केवल उत्पादन में गिरावट आई बल्कि कई छोटे कारोबारियों को तो अपना कारोबार समेटना पड़ा है। मोरबी सिरैमिक ट्रेडिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष के के पटेल ने कहा, 'गुजरात में करीब 2,200 कारोबारी और 700 टाइल और सैनिटरीवेयर निर्माण इकाइयां हैं। इनमें से अधिकांश मोरबी में हैं। इनमें से केवल 1,200 कारोबारी ही जीएसटी के तहत पंजीकृत हैं जबकि बाकी ऊंची कर दरों के कारण कारोबार से बाहर हो गए। अब करों में संशोधन से छोटे कारोबारी फिर से अपना कारोबार खड़ा कर  सकते हैं।' मोरबी सिरैमिक्स एसोसिएशन के अध्यक्ष के जी कुंदरिया का कहना है कि करीब आधी इकाइयों में ताजा कर संशोधन के मुताबिक उत्पादन शुरू हो सकता है।

भारत 75 करोड़ वर्ग मीटर उत्पादन के साथ सिरैमिक टाइल के मामले में चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बाजार है। इस उद्योग में असंगठित क्षेत्र की हिस्सेदारी करीब 60 फीसदी है। सेरा सैनिटरीवेयर के मुख्य कार्याधिकारी एस सी कोठारी ने कहा कि जीएसटी में कटौती से अब उद्योग में अनुपालन बढ़ेगा। उन्होंने कहा, 'उम्मीदों के उलट असंगठित क्षेत्र ने नई कर व्यवस्था का अनुपालन नहीं किया। अब कर की दर में कटौती से छोटी और मझोली कंपनियों के बीच अनुपालन बढ़ेगा जिससे आने वाले दिनों में सरकार की कमाई बढ़ेगी। हमारा मानना है कि अब बिक्री भी बढ़ेगी।' 

एशियन ग्रेनिटो इंडिया के सीएमडी कमलेश पटेल ने कहा कि कर की दर में कटौती से न केवल इस क्षेत्र में वृद्धि होगी बल्कि इससे असंगठित क्षेत्र की कंपनियों को भी कर भुगतान के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। ये कंपनियां नोटबंदी और रियल एस्टेट में मंदी के कारण परेशानियों का सामना कर रही हैं। 18 फीसदी जीएसटी के साथ असंगठित और संगठित कंपनियों के बीच अंतर कम हो जाएगा जिससे उद्योग का ही फायदा होगा। इस बीच दर में कटौती से मुंबई की लोहार चॉल जैसे इलाकों में काम से निकाले गए मजदूरों के चेहरे पर मुस्कान लौट सकती है। लोहार चॉल में पिछले चार महीनों में कई थोक और खुदरा कारोबारियों ने कई मजदूरों की छुट्टïी कर दी थी। ब्रांडेड और बिना ब्रांड वाले मैटरेस बेचने वाले मंजूनाथ ने कहा, 'हम उन्हें वापस लाकर अपना कारोबार बढ़ाएंगे।' उनकी योजना 40 मजदूरों को वापस लेने की है। दिल्ली में बिजली के उपकरणों के कारोबारी पुनीत ढिंगरा ने कहा कि कर की ऊंची दरों के कारण कारोबार प्रभावित हो रहा था।

(साथ में शुभायन चक्रवर्ती, अर्णव दत्ता और दिलीप झा)
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