जीएसटी में जमीन के लिए संशोधन जरूरी!

दिलाशा सेठ और इंदिविजल धस्माना | नई दिल्ली Nov 12, 2017 10:32 PM IST

रियल एस्टेट

रियल एस्टेट क्षेत्र में आवासीय क्षेत्र का योगदान 80 फीसदी तक
कृषि के बाद सबसे ज्यादा रोजगार मुहैया कराने वाला क्षेत्र
अगले दशक में 30 फीसदी तक हो सकती है वृद्धि

रियल एस्टेट को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत लाना जल्द संभव नहीं हो सकता है क्योंकि इसके लिए संविधान संशोधन करने की जरूरत पड़ सकती है और साथ ही जीएसटी कानून में भी बदलाव करने होंगे। सूत्रों का कहना है कि शुक्रवार को गुवाहाटी में जीएसटी परिषद के सामने इस मुद्दे पर दिए गए प्रजेंटेशन में यह बात स्पष्ट नहीं थी कि इस मकसद से संविधान में संशोधन करने की जरूरत पड़ेगी या नहीं लेकिन यह स्पष्ट हुई कि जीएसटी कानून में कुछ बदलाव करने की जरूरत होगी। 

सूत्रों का कहना है कि अधिकारियों द्वारा दिए गए प्रेजेंटेशन में कहा गया कि कानून मंत्रालय और अटॉर्नी जनरल से इस बाबत संपर्क किया जा सकता है कि संविधान संशोधन की जरूरत है या नहीं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि जीएसटी के तहत रियल एस्टेट को लाने के लिए संविधान संशोधन की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि इस मुद्दे पर जनवरी की शुरुआत में होने वाली जीएसटी परिषद की अगली बैठक में इस पर चर्चा हो सकती है। सूत्रों के मुताबिक प्रेजेंटेशन में कहा गया है कि संविधान अचल संपत्ति को परिभाषित नहीं करता है। इसके अलावा केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी) कानून की धारा 2 (52) वस्तुओं को पूंजी और प्रतिभूतियों से इतर सभी प्रकार की चल संपत्तियों को परिभाषित करता है। वहीं सीजीएसटी कानून की धारा 2 (102) में वस्तु, पूंजी और प्रतिभूतियों से इतर सेवाओं को परिभाषित किया गया है।

खेतान ऐंड कंपनी के अभिषेक रस्तोगी का कहना है कि अचल संपत्ति को इस तरह परिभाषित करना होगा कि यह आपूर्ति नियम के तहत आए। इसे सेवाओं में भी परिभाषित किया जा सकता है क्योंकि रियल एस्टेट से जुड़े निर्माण जीएसटी कानून में सेवाएं के तहत आते हैं। समस्या यह है कि पहली बार की खरीदारी और बिक्री सेवाओं में शामिल हो सकता है लेकिन उनका कहना है कि पुराने घरों की बिक्री और खरीदारी इसमें शामिल नहीं हो सकती है। 

दूसरी समस्या स्टैंप शुल्क से जुड़ी है। भारतीय स्टैंप अधिनियम, 1989 एक केंद्रीय कानून है और केंद्र स्टैंप शुल्क पर एक मॉडल कानून बना सकता है लेकिन जमीन और इमारत से जुड़े स्टैंप शुल्क की दरें राज्य तय करता है। स्टैंप शुल्क विभिन्न राज्यों में अलग-अलग है और यह 3-10 फीसदी के दायरे में है। एक राज्य में भी इस शुल्क में एक-जगह से दूसरी जगह में अंतर पाया जा सकता है। मिसाल के तौर पर महाराष्ट्र में बॉम्बे स्टैंप एक्ट, 1958 है जो राज्य में स्टैंप शुल्क और प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन का नियमन करता है। गुजरात, कर्नाटक, केरल, राजस्थान और तमिलनाडु का भी अपना स्टैंप शुल्क कानून हैं। स्टैंप शुल्क जहां जमीन और इमारतों से जुड़े दस्तावेजों से जुड़ा है जबकि जीएसटी प्रॉपर्टी की आपूर्ति और बिक्री से जुड़ा है। प्रजेंटेशन में में करों के दो अलग पहलुओं पर चर्चा हुई।

डेलॉयट के एम एस मणि का कहना है कि पूरे रियल एस्टेट क्षेत्र को जीएसटी फ्रेमवर्क में शामिल करने के लिए अहम कानूनी बदलाव करने की जरूरत होगी जिसके लिए एक संविधान संशोधन करने की जरूरत होगी क्योंकि जमीन और इमारतों से जुड़ा कराधान फिलहाल राज्य सूची से जुड़ा है।

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