अमेरिका में बढ़ाया निवेश और रोजगार

शुभायन चक्रवर्ती | नई दिल्ली Nov 15, 2017 09:52 PM IST

अमेरिकी अर्थव्यवस्था में करीब 17.9 अरब डॉलर का निवेश करने के साथ-साथ 100 शीर्ष भारतीय कंपनियों ने अमेरिका में 1,13,000 हजार से ज्यादा नौकरियां देने में कामयाबी हासिल की है। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) की बुधवार को जारी, 'इंडियन रूट्स, अमेरिकन सॉयल' शीर्षक वाली रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय कंपनियों ने अमेरिका में कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीसीआई) में 14.7 करोड़ डॉलर का योगदान किया। इन कंपनियों ने यहां शोध एवं विकास गतिविधियों पर  58.8 करोड़ डॉलर खर्च किए।  
 
इस रिपोर्ट के आंकड़ें दर्शाते हैं कि अमेरिका के सभी 50 राज्यों में भारतीय प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) किया गया है कि और 100 प्रमुख भारतीय कंपनियों द्वारा किए गए निवेश का एक अहम असर अमेरिकी अर्थव्यवस्था में देखा गया। ज्यादातर निवेश बड़े विनिर्माण केंद्रों मसलन न्यूजर्सी और न्यूयॉर्क के अलावा टेक्सस और कैलिफॉर्निया में केंद्रित हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 23 राज्योंं में 10 या इससे ज्यादा भारतीय कंपनियां मौजूद हैं।  एक वरिष्ठ राजनयिक ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि ये आंकड़े अमेरिकी सरकार के उन तर्कों को खारिज करते हैं कि विदेशी कंपनियां केवल देश के बाहर पैसा ले जा रही हैं। अमेरिकी सांसदों ने वीजा फीस बढ़ाने और एच1बी और एल1 वीजा की तादाद घटाने का प्रस्ताव रखा था जिसका इस्तेमाल ज्यादातर सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र से जुड़े भारतीय पेशेवर करते हैं। 
 
वाणिज्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है, 'भारत ने इस कदम को संरक्षणवादी कदम करार दिया था और कहा था कि इसका सेवाओं से जुड़े कारोबार पर विपरीत असर पड़ेगा। भारत की सेवा कंपनियों को सालाना सीमा, ज्यादा वीजा शुल्क और खारिज करने की दर जैसी चुनौतियों की वजह से एच-1बी वीजा और एल-1 वीजा हासिल करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।' फिलहाल दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय कारोबार 6.67 लाख करोड़ रुपये से अधिक है और दोनों देशों के बीच वाणिज्यिक वस्तुओं का कारोबार 4.14 लाख करोड़ रुपये है। अमेरिका में भारत का निर्यात 40 अरब डॉलर से अधिक है, इस तरह भारतीय वस्तुओं के लिए यह सबसे बड़ा विदेशी बाजार है। रिपोर्ट के मुताबिक, 'भारतीय कंपनियां अपनी सफलता के बलबूते ही अमेरिका में एफडीआई के शीर्ष 10 तेजी से वृद्धि करने वाले स्रोतों में शामिल है। 
 
भारतीय कंपनियां सामुदायिक कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए भी पूरे देश में फंडिंग कर रही हैं। इसके अलावा उनका सीएसआर कार्यक्रम भी लोकप्रिय हो रहा है जिसके तहत छात्रों और अमेरिकी विशेषज्ञों को स्टेम प्रशिक्षण दिया जाता है।' अमेरिका के साथ पहली मंत्रालय स्तर की व्यापार मंत्रणा में पिछले महीने भारत ने इस ओर इशारा किया था कि घरेलू कंपनियों ने विभिन्न क्षेत्रों में शोध एवं विकास में भारी निवेश किया है जिससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था की प्रतिस्पद्र्धा करने की क्षमता बढ़ी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रति राज्य भारतीय कंपनियों द्वारा मिली औसत निवेश राशि 18.7 करोड़ डॉलर से अधिक है। इसके अलावा 85 फीसदी कंपनियां देश में और ज्यादा निवेश करने की योजना बना रही है जबकि 87 फीसदी कंपनियां अगले 5 सालों के दौरान स्थानीय स्तर पर ज्यादा कर्मचारियों को नियुक्त करने की योजना बना रही हैं।
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