अर्थक्रांति का प्रस्ताव नहीं व्यावहारिक: एनआईपीएफपी

ईशान बख्शी | नई दिल्ली Nov 15, 2017 09:52 PM IST

मौजूदा कर व्यवस्था (सीमा शुल्क को छोड़कर प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कर) की जगह बैंकिंग लेन-देन कर (बीटीटी) को तरजीह देने के अर्थक्रांति के प्रस्ताव का मूल्यांकन करते हुए थिंक टैंक राष्ट्रीय लोक वित्त और नीति संस्थान (एनआईपीएफपी) ने यह पाया कि सभी मानकों के लिहाज से विशिष्ट कर साबित नहीं हो सकता है। एनआईपीएफपी ने इस मूल्यांकन रिपोर्ट को उस वक्त सार्वजनिक किया है जब 2018-19 की बजट प्रक्रिया जारी है। अर्थक्रांति प्रस्ताव का मूल्यांकन शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में कहा गया, 'बीटीटी समानता के स्तर को हासिल करने में नाकाम है जैसी कि हमारी मौजूदा व्यवस्था है। यह अपने प्रारूप में करों के लिए एक व्यापक आधार का वादा करता है लेकिन आखिरकार फिर कुछ सिफारिशों की वकालत करता है जिससे कर आधार कम होता है और बीटीटी की खूबियां कम हो जाती है।'
 
हालांकि इस रिपोर्ट के मुताबिक आसानी से अमलीजामा पहनाए जाने और बैंकों के जरिये की जाने वाली निगरानी के लिहाज से बीटीटी काफी बेहतर है। लेकिन इस बात पर संदेह जताया गया है कि नीति निर्माता इस कराधान के जरिये कई लक्ष्यों को हासिल करने का जो लक्ष्य लेकर चलते हैं वह बीटीटी के मूल और आकर्षण संस्करण के जरिये संभव नहीं होगा। यह संभावना भी है कि अगर बैंकिंग तंत्र वक्त के साथ परिपक्व होता है तो कर का भुगतान न करने के लिए कुछ ट्रांजेक्शन तंत्र की उपेक्षा कर सकते हैं। इस तरह बीटीटी में सेंध लगाने की पूरी गुंजाइश बन सकती है।
 
वस्तु एवं सेवा कर के मुकाबले बीटीटी विभिन्न चरणों वाला कर है जहां कर की दर कुछ मामलों में 2 फीसदी से 6 फीसदी ज्यादा हो सकती है। अर्थक्रांति के प्रस्ताव में बीटीटी को पूरा कर्ज और प्राप्तियां एक उचित दर पर लेने का प्रस्ताव दिया गया है जो संभवत: 2 फीसदी तक हो सकती है। कर से मिले राजस्व को केंद्र, राज्य और स्थानीय निकायों के बीच तथा लेन-देन करने वाले बैंक के बीच विभाजित किया जाएगा। अर्थक्रांति ने केंद्र के लिए 0.7 फीसदी, राज्य के लिए 0.6 फीसदी और स्थानीय निकाय तथा लेन-देन करने वाले बैंक प्रत्येक के लिए 0.35 फीसदी अनुपात का सुझाव दिया है। 
 
एनआईपीएफपी के मूल्यांकन से यह खुलासा हुआ है कि 2 फीसदी बीटीटी प्रभावी कर देनदारी में व्यापक तौर पर इजाफा करेगा। संगठित विनिर्माण क्षेत्र में ही इसने यह अनुमान लगाया है कि प्रभावी कर दर करीब 14.3 फीसदी तक होगी।  वर्ष 2016 की शुरुआत में मध्य प्रदेश और हरियाणा की राज्य सरकारों ने अर्थक्रांति के उन प्रस्तावों का मूल्यांकन करने के लिए एनआईपीएफपी से संपर्क किया था जिनमें ज्यादा मूल्य वाले नोटों को वापस लेने और मौजूदा करों की जगह बीटीटी लागू करने का प्रस्ताव शामिल था।
 
रिपोर्ट में दो तरह की नोटबंदी के असर का अध्ययन भी शामिल है, पहला जिसमें ज्यादा मूल्य वाले नोटों की नोटबंदी जिसकी जगह कम मूल्य वाली मुद्रा ले सके, जिसकी मांग लोग भी करते हैं। दूसरा, ज्यादा मूल्य वाले नोटों की नोटबंदी की जगह उसी अनुपात में बैंक जमाएं ले ले। इस अध्ययन में पहली नोटबंदी को मध्यम स्तर का बताया गया जबकि दूसरे तरह की नोटबंदी को आक्रामक बताया गया। जब यह पूछा गया कि नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा की गई नोटबंदी को किस श्रेणी में शामिल किया जा सकता है, इस पर रिपोर्ट की एक लेखक कविता राव ने कहा कि यह किसी भी श्रेणी में शामिल नहींं है लेकिन यह मध्यम स्तर वाली नोटबंदी से मिलता-जुलता था।  इस अध्ययन में कहा गया है कि नोटबंदी के नरम मॉडल का अर्थव्यवस्था पर कुछ प्रभाव दिखेगा क्योंकि आर्थिक गतिविधियां बाधित नहीं होती हैं।
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