मुनाफाखोरी पड़ेगी अब भारी

इंदिवजल धस्माना | नई दिल्ली Nov 16, 2017 10:44 PM IST

गठित होगा निकाय

► प्राधिकरण में चेयरमैन सहित होंगे पांच सदस्य
कर में कटौती का लाभ नहीं देने वालों की ग्राहक कर सकेंगे शिकायत
दोषी पाए जाने पर जुर्माना और पंजीकरण रद्द करने का होगा अधिकार
लाभार्थी तय नहीं होने पर बेजा मुनाफे की राशि ग्राहक कल्याण कोष में होगी जमा

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत 200 से अधिक वस्तुओं पर कर की दर में कटौती लागू होने के एक दिन बाद ही केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जीएसटी के तहत राष्ट्रीय मुनाफाखोरी-निरोधक प्राधिकरण बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इस कदम का मकसद करों में कमी का लाभ ग्राहकों तक पहुंचाना है। असल में खबरें मिली थीं कि दरों में कटौती के बाद भी कुछ रेस्टोरेंट इसका लाभ ग्राहकों को नहीं दे रहे हैं। ऐसे में इस पहल से मुनाफाखोरों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।

मंत्रिमंडल ने प्राधिकरण के चेयरमैन और सदस्यों के पद सृजित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी, जो यह सुनिश्चित करेंगे कि नई कर व्यवस्था के तहत कम कर दरों का फायदा ग्राहकों को मिले। केंद्रीय विधि मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा, 'इससे मुनाफाखोरी रोकने के लिए शीर्ष प्राधिकरण गठित करने का रास्ता साफ हो गया है।' प्रसाद ने कहा कि फिलहाल जीएसटी के तहत उच्चतम 28 फीसदी कर दायरे में केवल 50 वस्तुएं हैं।

उन्होंने कहा, 'अगर किसी ग्राहक को लगता है कि उसे कर की दर में कटौती का लाभ नहीं मिल रहा है तो वह प्राधिकरण में उसकी शिकायत कर सकता है।' जीएसटी परिषद ने ग्राहकों की शिकायत दर्ज करने के लिए पांच सदस्यीय प्राधिकरण गठित करने की मंजूरी दी थी। कैबिनेट सचिव पीके सिन्हा, राजस्व सचिव हसमुख अढिया, सीबीईसी चेयरमैन वनजा सरना और दो राज्यों के मुख्य सचिवों वाली इस समिति को प्राधिकरण के चेयरमैन एवं सदस्यों के नाम तय करने को कहा गया था।

डेलॉयट के एमएस मैनी ने कहा, 'अब उम्मीद है कि सरकार जल्द ही अधिसूचना जारी कर बताएगी कि मुनाफाखोरी का पता कैसे लगाया जाए।' क्लियरटैक्स के मुख्य कार्याधिकारी अर्चित गुप्ता ने कहा कि निकाय को इसके बारे में विस्तृत दिशानिर्देश जारी करने चाहिए कि उच्चतर इनपुट टैक्स क्रेडिट का कैसे उपयोग किया जाए। उन्होंने कहा, 'हम उम्मीद करते हैं कि निकाय का गठन स्पष्टता के साथ किया जाएगा और इससे इंस्पेक्टर राज की वापसी नहीं होगी।'

प्राधिकरण का कार्यकाल इसके चेयरमैन की नियुक्ति की तिथि से दो साल तक होगा। चेयरमैन और इसके चार सदस्यों की आयु 62 साल से कम उम्र की होगी। मुनाफाखोरी-निरोधक प्रणाली में स्थानीय प्रकृति की शिकायतें पहले राज्य स्तरीय जांच समिति के पास भेजी जाएंगी, वहीं राष्ट्रीय स्तर के मामलों को स्थायी समिति के पास भेजा जाएगा। अगर शिकायत वाजिब लगे तो संबंधित समितियां उसे आगे की जांच के लिए के सेफगार्ड महानिदेशालय (डीजीएस) को भेज सकती हैं। डीजी करीब तीन माह में जांच पूरी कर प्राधिकरण को अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे। 

अगर प्राधिकरण को पता चलता है कि कंपनी ने जीएसटी के लाभ ग्राहकों को नहीं दिए, तो कंपनी को निर्देश दे सकती है कि वह ग्राहकों को इसका लाभ दे। लाभार्थी की पहचान नहीं होने की स्थिति में कंपनी से 'ग्राहक कल्याण कोष' में तय समय के अंदर उक्त राशि जमा कराने को कहा जाएगा। प्राधिकरण के पास दोषी कंपनी का पंजीकरण रद्द करने का अधिकार होगा लेकिन संभवत: अंतिम कदम के तौर पर इसका इस्तेमाल किया जाएगा। मुनाफाखोरी-निरोधक नियमों के अनुसार प्राधिकरण अनुचित मुनाफे को 18 फीसदी ब्याज के साथ ग्राहकों को वापस करने का निर्देश दे सकता है और साथ ही उस पर जुर्माना भी लगाने का अधिकार होगा।
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