दिल्ली को छोड़कर सभी राज्यों को राजस्व घाटा

दिलाशा सेठ | नई दिल्ली Nov 17, 2017 09:52 PM IST

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की वजह से अक्टूबर में दिल्ली को छोड़कर सभी राज्यों ने राजस्व घाटा दर्ज किया। ऐसे में इस महीने के दौरान केंद्र से 7,500 करोड़ रुपये के मुआवजे की जरूरत होगी। इससे केंद्र के राजकोषीय घाटे पर असर शायद ही पड़े क्योंकि इसकी भरपाई अक्टूबर में मुआवजा उपकर के तौर पर संग्रहित 8,000 करोड़ रुपये से हो सकती है। कर राजस्व अक्टूबर महीने में संग्रहित किया गया था लेकिन यह अक्टूबर महीने के लिए नहीं था जिसके लिए कर भुगतान करने की आखिरी तारीख 20 नवंबर है। 
 
हाल ही में जीएसटी परिषद ने 200 से ज्यादा वस्तुओं की दरें कम करने का फैसला किया जिसकी वजह से केंद्र का राजस्व संग्रह लक्ष्य थोड़ा दबाव में आ सकता है। इसके अलावा एकीकृत जीएसटी (आईजीएसटी) से संग्रहित राजस्व का इस्तेमाल जमा राशि के तौर पर बाद में कर भुगतान के लिए किया जा सकता है। एक अधिकारी का कहना है, 'राजकोषीय घाटे के असर का अनुमान लगाना बेहद जल्दबाजी होगी। अब तक के रुझान को देखें तो संग्रहित मुआवजा उपकर राज्यों के राजस्व घाटे से भी ज्यादा है। एक बार जब जीएसटी का काम सुचारु रूप से चलने लगेगा तब राज्यों के संग्रह में भी सुधार होगा।'
 
उपभोक्ता राज्यों ने विनिर्माता राज्यों के मुकाबले ज्यादा राजस्व घाटा दर्ज किया है और यह बात उस आम धारणा के विपरीत जाती है कि उपभोक्ता राज्यों को जीएसटी से ज्यादा फायदा मिलेगा क्योंकि यह अंतिम चरण पर आधारित कर है। करीब 17 राज्यों ने 25 फीसदी से 59 फीसदी राजस्व घाटा दर्ज किया है। पुद्दुचेरी, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ ने क्रमश: अनुमान के मुकाबले 59 फीसदी, 50 फीसदी और 46 फीसदी कम राजस्व पाया है। वहीं उत्तर प्रदेश और हरियाणा ने क्रमश: 17 फीसदी और 16 फीसदी कम राजस्व हासिल किया है। 
 
केंद्र ने जुलाई और अगस्त महीने के लिए मुआवजा उपकर के तौर पर संग्रहित 14,000 करोड़ रुपये की राशि में से 8,500 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। नुकसानदेह वस्तुओं मसलन तंबाकू और लक्जरी उत्पादों मसलन बड़ी कारें और एयरेटेड ड्रिंक पर लगी 28 फीसदी जीएसटी दर पर एक उपकर लगाया गया है। हाल ही में सिगरेट और बड़ी कारों पर उपकर लगाया गया।
 
जीएसटी परिषद ने 15 नवंबर से ही 215 वस्तुओं पर दरें कम करने का फैसला किया था जिनमें से 176 वस्तुओं की दरें 28 फीसदी से कम होकर 18 फीसदी हो गईं। बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने एक साल में राजस्व घाटे की वजह 20,000 करोड़ रुपये जीएसटी दरों में कटौती को बताया है। वित्त वर्ष के बाकी साढ़े चार महीने के दौरान यह करीब 7,500 करोड़ रुपये होगा। 
 
कर विशेषज्ञों का मानना है, 'देश में कर के इतिहास पर नजर डालें तो यह साबित होता है कि जब भी कर की दरों में कमी की गई तब कर संग्रह में बढ़ोतरी हुई है।' पीडब्ल्यूसी इंडिया के प्रतीक जैन का कहना है, 'बेहतर अनुपालन से राजस्व में सुधार हो सकता है। इन उत्पादों की कीमतों में कमी से मांग में बढ़ोतरी होनी चाहिए।' वहीं ईवाई के बिपिन सप्रा का कहना है, 'दरों में कमी से कई जिंसों की कीमतों में कमी आएगी, हालांकि सरकार को राजस्व के संतुलन पर सोचने की जरूरत है।'
कीवर्ड GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,

  
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