रेस्तरां की दलील पर सरकार नहीं राजी

दिलाशा सेठ | नई दिल्ली Nov 24, 2017 10:14 PM IST

नए लघु वित्त बैंकों (एसएफबी) की शुरुआत बेहद निराशाजनक रही है क्योंकि  कई बैंकों ने मुनाफे में कमी के साथ ही वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में घाटा दर्ज किया है। दरअसल इन बैंकों की मुश्किलें सूक्ष्म वित्त खातों के कारण बढ़ी हैं। कई एसएफबी को कर्ज की रिकवरी न होने की वजह से बड़ी मात्रा में ज्यादा प्रावधान राशि रखनी पड़ी थी।  नोटबंदी और किसान कर्जमाफी की अफवाहों की वजह से इस उद्योग ने फंसे हुए कर्जों (एनपीए) में 5 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी देखी जो नोटबंदी से पहले करीब एक फीसदी तक थी। उज्जीवन स्मॉल फाइनैंस बैंक की नियंत्रक कंपनी उज्जीवन फाइनैंशियल सर्विसेज ने वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 12 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा दर्ज किया है जिसने पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 73 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया था। पहली तिमाही में भी बैंक ने करीब 75 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा दर्ज किया। बैंक को फंसे हुए कर्ज की वजह से पहली तिमाही में करीब 88 करोड़ रुपये का प्रावधान करना पड़ा। फंसे हुए कर्ज के लिए ज्यादा प्रावधान रखने की वजह से इक्विटास होल्डिंग ने दूसरी तिमाही के शुद्ध मुनाफे में 76 फीसदी की कमी दर्ज की जो 10.91 करोड़ रुपये रहा जबकि पिछले साल यह शुद्ध लाभ करीब 46.34 करोड़ रुपये था। एयू स्मॉल फाइनैंस बैंक ने करीब 68 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया था जो एक साल पहले की समान अवधि के दौरान 70 करोड़ रुपये था। 
 
उज्जीवन, इक्विटास और एयू लघु वित्त बैंक तीन सूचीबद्ध लघु वित्त बैंक हैं। फिनकेयर स्मॉल फाइनैंस बैंक को वित्त वर्ष की पहली छमाही के दौरान ज्यादा प्रावधान की वजह से घाटा दर्ज करना पड़ा। फिनकेयर के मुख्य कार्यकारी राजीव यादव का कहना है, 'उद्योग के मुनाफे में ज्यादातर गिरावट सूक्ष्मवित्त पोर्टफोलियो के प्रावधान की वजह से हुई जिस पर नोटबंदी का असर दिखा। हमने एक बार प्रावधान किया था जिससे घाटा हुआ। हमने इस दफा अपने पोर्टफोलियो का 3-4 फीसदी प्रावधान रखा है।'
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