अगले वित्त की दूसरी तिमाही में मजबूत होगी अर्थव्यवस्था!

ईशान बख्शी |  Nov 26, 2017 10:03 PM IST

यदि अब तक सामने आए कॉरपोरेट परिणामों पर भरोसा किया जाए तो संकेत मिलता है कि नोटबंदी और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से पैदा हुए दबाव के बाद वित्त वर्ष 2018 की दूसरी तिमाही में अर्थव्यवस्था में तेजी आ सकती है। लगभग 300 कंपनियों की सकल मूल्य वृद्घि (जीवीए) वित्त वर्ष 2018 की दूसरी तिमाही में शानदार 13 फीसदी की दर से बढ़ी है जबकि वित्त वर्ष 2018 की पहली तिमाही में यह 8.4 फीसदी के साथ चार तिमाहियों के निचले स्तर पर थी। वित्त वर्ष 2017 की तीसरी तिमाही में 16.3 फीसदी तक की वृद्घि के बाद इन चुनिंदा कंपनियों की जीवीए वित्त वर्ष 2017 की चौथी तिमाही में घटकर 9.8 फीसदी रह गई। इससे अर्थव्यवस्था के बदलते रुझान का पता चलता है।

 
वित्त वर्ष 2018 की पहली तिमाही में आर्थिक गतिविधि प्रभावित हुई थी, क्योंकि कंपनियों ने उत्पादन में कटौती की और नई कर व्यवस्था में ढलने के लिए माल को जल्दबाजी में निकाला। इसके परिणामस्वरूप, वास्तविक वृद्घि निर्माण गतिविधि महज 1.2 फीसदी तक बढऩे से प्रभावित हुई। कुल मिलाकर आर्थिक वृद्घि अप्रैल-जून तिमाही में 5.7 फीसदी के तीन वर्ष के निचले स्तर पर आ गई।
 
लेकिन यदि मौजूद अनुमान मजबूत अर्थव्यवस्था की स्थिति को दर्शा रहे हैं तो इससे संकेत मिलता है कि अर्थव्यवस्था में वित्त वर्ष 2018 की पहली तिमाही में सुधार देखा जा सकता है। इक्रा में मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर कहती हैं, 'अब तक प्राप्त आंकड़ों के आधार पर हमें उम्मीद है कि वास्तविक सकल मूल्य वृद्घि वित्त वर्ष 2018 की दूसरी तिमाही में 6.3 फीसदी की दर से बढ़ेगी जबकि जीडीपी वृद्घि 6.4 फीसदी रहने का अनुमान है।'  दूसरी तिमाही के जीडीपी के लिए आंकड़ा इस महीने के अंत तक आएगा।
 
दूसरी तिमाही के पहले दो महीनों में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) 2.6 फीसदी तक बढ़ा, जो पूर्ववर्ती तिमाही के 1.9 फीसदी से ज्यादा है। पूरी तिमाही के लिए वृद्घि का अनुमान अगले कुछ दिनों में उपलब्ध हो जाएगा। कोटक इंस्टीट्ïयूशनल इक्विटीज में अर्थशास्त्री शुभदीप रक्षित कहते हैं, 'हमें उम्मीद है कि नोटबंदी और जीएसटी का प्रभाव कुछ कम होने से दूसरी तिमाही में आर्थिक वृद्घि लगभग 6.5 फीसदी रहेगी। निर्माण क्षेत्र में सुधार आ रहा है। पहली तिमाही में शुरू हुई माल जल्द निकालने की प्रक्रिया में धीरे धीरे बदलाव आने की संभावना है।'  लेकिन दूसरी तिमाही में केंद्र सरकार के खर्च में कमी आना चिंताजनक है।
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