जीएसटीएन की मुश्किल बरकरार

अभिषेक रक्षित | कोलकाता Dec 03, 2017 09:50 PM IST

वस्तु एवं सेवा कर नेटवर्क (जीएसटीएन) में तकनीकी बाधाओं का हल निकलने में 6-9 महीने का वक्त अभी और लग सकता है जिसकी वजह से देश के कई कारोबारियों और राजनेताओं का गुस्सा बढ़ा है। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज की टीसीएस आईओएन के वैश्विक प्रमुख वी रामास्वामी का मानना है कि जीएसटीएन में गड़बड़ी को लेकर जो हंगामा हो रहा है वह नीतिगत और तकनीकी मसले का मिला-जुला रूप है जिसका हल अगले 6-9 महीने में निकाला जा सकता है। 

 
जीएसटीएन और विभिन्न जीएसटी (जीएसटी सेवा प्रदाताओं) के बीच मंच एकीकरण की वजह से कर रिटर्न दाखिल करते वक्त भुगतान नहीं हो पाता जो प्रमुख बाधा बन रही है। बिजनेस स्टैंडर्ड के रामास्वामी का कहना है, 'जीएसटीएन दरअसल जीएसपीएन और कई दूसरे संगठनों के मंच से जुड़ता है। यह एकीकरण अभी पूरी तरह से स्थायी नहीं हो पाया है।' वर्ष 2015 में इन्फोसिस ने 1380 करोड़ रुपये में एक करार किया था जिसके तहत कंपनी को एक ऐसा मंच तैयार करना और संचालित करना था जिसके जरिये कंपनियां अपना जीएसटी रिटर्न दाखिल कर सकें। इसे बाद में जीएसटीएन के नाम से जाना गया। इसके अलावा 32 कंपनियों का चयन किया गया जिन्हें जीएसटीएन से जोडऩे के लिए करदाताओं का जरिया बनना था जिन्हें जीएसपी के नाम से जाना जाता है और इन कंपनियों में टीसीएस भी शामिल है। हालांकि एक कंपनी के तौर पर टीसीएस ऐसी ही एक जीएसटी सेवा प्रदाता है और पूरा मंच टीसीएस के आईओएन से संचालित होता है। यह टीसीएस की ऐसी इकाई है जिसे शिक्षा और लघु मध्यम उद्यमों के लिए आईटी सेवाओं में दक्षता हासिल है।
कीवर्ड GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,

  
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