कर संग्रह लक्ष्य कम करेगा सीबीडीटी

दिलाशा सेठ | नई दिल्ली Dec 04, 2017 09:51 PM IST

निगम कर संग्रह पर असर पड़ने के आसार

चुनौतीपूर्ण राजकोषीय माहौल में केंद्र को प्रत्यक्ष कर के मोर्चे पर भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने आर्थिक गतिविधियां कम होने की वजह से मौजूदा वित्त वर्ष के लिए बजटीय संग्रह लक्ष्य को कम करने का मन बनाया है। निवेश गतिविधि में कमजोरी बरकरार रहने से निगम कर संग्रह पर असर पड़ने की संभावना है और इससे विभाग को 9.8 लाख करोड़ रुपये के लक्ष्य को कम करने के लिए कदम उठाना पड़ता है जो पिछले साल के मुताबिक 15.7 फीसदी अधिक है।

एक सरकारी अधिकारी का कहना है, 'हमने प्रत्यक्ष कर संग्रह लक्ष्य में कटौती करने के लिए कहा है। मौजूदा वृद्धि दर खराब नहीं है लेकिन अगर अर्थव्यवस्था और निवेश में तेजी नहीं आती है तो राह मुश्किल हो सकती है। लेकिन हमें यह देखना होगा कि सरकार इसके लिए राजी होती है या नहीं।' विभाग ने लक्ष्य में करीब 20,000 करोड़ रुपये की कटौती के लिए कहा है। अगर यह स्वीकार कर ली जाती है तो मौजूदा वर्ष के संशोधित अनुमान में निचले स्तर का सुधार दिखेगा। 

केंद्र सरकार की राजस्व चिंता और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह को अभी स्थिर होना है और अक्टूबर तक राजस्व घाटा ने बजट लक्ष्य के 96 फीसदी के स्तर को छू लिया। एक अधिकारी ने बताया, 'हम किसी रिफंड को रोकना नहीं चाहते हैं। इसी वजह से हम वास्तविक लक्ष्य को पेश करना चाहते हैं। ऐसा न करने पर अधिकारी अनुचित तरीके से लक्ष्य पूरा करने की कोशिश कर सकते हैं इसलिए इसे कम करना जरूरी है।' पिछले साल सीबीडीटी ने अपने संशोधित अनुमान में लक्ष्य को बढ़ाने के प्रस्ताव के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था। वित्त वर्ष की पहली छमाही में अग्रिम कर संग्रह में वृद्धि कम होकर 11 फीसदी हो गई जो एक साल पहले 14 फीसदी तक थी। इससे सरकार के कर संग्रह लक्ष्य को एक चुनौती मिल रही है।

सितंबर में सीबीडीटी के अध्यक्ष सुशील चंद्र ने अधिकारियों को उन कंपनियों और संस्थाओं की जांच करने के लिए कहा है जिन्होंने मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही में 10 फीसदी कम स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) का भुगतान किया है। पहली छमाही में टीडीएस वृद्धि पिछले साल की समान अवधि की 17 फीसदी वृद्धि के मुकाबले करीब 10.44 फीसदी थी। करीब 45 फीसदी प्रत्यक्ष कर राजस्व संग्रह अग्रिम कर, 35 फीसदी टीडीएस, 10 फीसदी स्व मूल्यांकन और 10 फीसदी रिकवरी से मिलता है। 

सितंबर में खत्म हुई तिमाही में देश का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) बढ़कर 6.3 फीसदी के स्तर पर चला गया जो पिछली तिमाहियों के 5.7 फीसदी के मुकाबले अधिक था। वहीं दूसरी तिमाही में निवेश में 4.6 फीसदी की वृद्धि दिखी जो सालाना आधार पर पहली तिमाही में 1.6 फीसदी तक थी। पहली तिमाही में जीडीपी में इसकी हिस्सेदारी 29.9 फीसदी से कम होकर 28.9 फीसदी हो गई जिससे यह संकेत मिलता है कि अर्थव्यवस्था में जीएसटी से जुड़ा दबाव कुछ हद तक देखने को मिला।
कीवर्ड income tax, CBDT, आयकर विभाग कराधान,

  
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