निर्यातकों को रियायतों का तोहफा

ईशान बख्शी और अरूप रायचौधरी | नई दिल्ली Dec 05, 2017 10:40 PM IST

एफटीपी की मध्यावधि समीक्षा

► निर्यात को बढ़ावा देने के लिए रोजगार देने वाले क्षेत्रों को मिलेगा प्रोत्साहन
नए प्रोत्साहनों पर होगा सालाना 8,450 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय
एसएमई के लिए निर्यात योजना के तहत प्रोत्साहन दर दो फीसदी बढ़ेगी
सेकंड हैंड, पुरानी पूंजीगत वस्तुओं के आयात से पाबंदी हटाई
विशेष आर्थिक क्षेत्र के आपूर्तिकर्ताओं के लिए शून्य जीएसटी

सरकार ने श्रम आधारित रोजगारपरक वस्तुओं एवं सेवाओं के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन देने की घोषणा की है। सरकार के इस कदम से सालाना करीब 8,450 करोड़ रुपये का बोझ बढ़ेगा और इस वित्त वर्ष के बाकी बचे महीनों में 2,816 करोड़ रुपये अतिरिक्त व्यय करने होंगे। बहुप्रतीक्षित विदेश व्यापार नीति की मध्यावधि समीक्षा के दौरान इसकी घोषणा की गई। निर्यातक इस प्रोत्साहन का विस्तार अन्य क्षेत्रों में भी करने की मांग कर रहे थे क्योंकि पिछले कुछ समय से उन्हें चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। 

सरकार ने निर्यातकों को भरोसा दिलाया है कि उनकी फंसी पूंजी को तेजी से जारी किया जाएगा, साथ ही सलाह दी कि वे फॉर्म को सही तरीके से दाखिल करें। ऐसा इसलिए कहा गया है क्योंकि कई निर्यातकों ने इनपुट क्रेडिट चुकाए गए कर से ज्यादा भरा है। हालांकि वस्तु एवं सेवा कर के बाद से निर्यातकों के करीब 50,000 करोड़ रुपये काफी समय से रिफंड के लिए अटके पड़े हैं।

नीति में 900 अरब डॉलर के निर्यात लक्ष्य को हासिल करने के बारे में कुछ नहीं कहा गया लेकिन नए बाजारों और नए उत्पादों की संभावनाएं तलाशना और परंपरागत बाजारों तथा उत्पादों के निर्यात में भारत का हिस्सा बढ़ाने पर जोर दिया गया। मध्यावधि समीक्षा का मकसद रोजगार बढ़ाने वाले क्षेत्रों जैसे चमड़ा, हस्तशिल्प, कालीन, खेल के सामान, कृषि, समुद्री उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक पुर्जों सहित अन्य सेवाओं के निर्यात को बढ़ावा देना है।

वाणिज्य विभाग ने भारत से वस्तु निर्यात योजना (एमईआईएस) के तहत टेक्सटाइल के दो-उप क्षेत्रों सिलेसिलाए परिधान और मेडअप्स के लिए प्रोत्साहन दर को 2 फीसदी से बढ़ाकर 4 कर दिया। इसमें अतिरिक्त वार्षिक प्रोत्साहन 2,743 करोड़ रुपये का दिया जाएगा। हालांकि इसकी घोषणा पहले की गई थी और समीक्षा में भी इसे दोहराया गया। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा कि विदेश व्यापार नीति के तहत चमड़ा क्षेत्र को 749 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वार्षिक प्रोत्साहन मिलेगा। हाथ से बनी रेशमी कालीन, हथकरघा, नारियल रेशे और जूट उत्पादों के लिए 921 करोड़ रुपये, कृषि उत्पादों के लिए 1,354 करोड़ रुपये, समुद्री उत्पादों के लिए 759 करोड़ रुपये, दूरसंचार, इलेक्ट्रॉनिक कलपुर्जा क्षेत्र के लिए 369 करोड़ रुपये और चिकित्सा उपकरण क्षेत्र के लिए 193 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाएगा।

इसके अलावा श्रम बहुल उद्योगों और सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उपक्रमों वाले समूचे क्षेत्र के लिए भारत से वस्तु निर्यात योजना के तहत प्रोत्साहन दर दो फीसदी बढ़ाई जाएगी। इससे इन क्षेत्रों को सालाना 4,567 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाएगा।  भारत से सेवाओं के निर्यात योजना (एसईआईएस) प्रोत्साहन को भी 2 फीसदी बढ़ाया गया है। इसका मकसद कानूनी, अकाउंटिंग, वास्तुकला, शिक्षा एवं अन्य सेवाओं के निर्यात को बढ़ावा देना है। इन क्षेत्रों को सालाना 1,140 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन मिलेगा।

साथ ही इन प्र्रतिभूतियों के हस्तांतरण और बिक्री पर लगने वाली जीएसटी दर को 12 फीसदी से घटाकर शून्य कर दिया तथा उसकी वैधता अवधि मौजूदा 18 माह से बढ़ाकर 24 माह की गई है। निर्यातकों को अब शुल्क-मुक्त कच्चे माल के लिए स्व-प्रमाणित दस्तावेज की जरूरत होगी। हालांकि यह योजना शुरुआत में अधिकृत आर्थिक ऑपरेटरों के लिए ही उपलब्ध होगी। वाणिज्य सचिव रीता तेवतिया ने कहा कि वैश्विक व्यापार में तेजी आ रही है और उभरती अर्थव्यवस्था वाले बाजारों को इसका ज्यादा फायदा दिख रहा है। उन्होंने कहा, 'हमें इन बाजारों में पैठ बढ़ाना है।'
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