ग्रामीण रोजगार योजना से नहीं घटा विस्थापन

संजीव मुखर्जी | नई दिल्ली Dec 15, 2017 10:13 PM IST

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) से ग्रामीण इलाकों में जीविका का सृजन हुआ है, लेकिन इससे विस्थापन पर लगाम लगने का मुख्य मकसद पूरा नहीं हुआ हैइंस्टीट्यूट आफ इकनॉमिक ग्रोथ (आईईजी) की ओर से कराए गए एक सर्वे के मुताबिक मनरेगा के तहत जल संरक्षण का ढांचा तैयार किए जाने से करीब 78 प्रतिशत परिवारों के इलाके में जल स्तर बढ़ा है। ग्रामीण आमदनी में 11 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है। वहीं सर्वे किए गए करीब 80 प्रतिसत जिले में विस्थापन में किसी कमी के संकेत नहीं मिले। सिर्फ 20 प्रतिशत जिलों के आंकड़ों से पता चलता है कि मनरेगा की वजह से उन जिलों में विस्थापन में कमी आई है।

सर्वे किए गए सभी 30 जिलों में करीब 18 प्रतिशत लाभार्थी परिवार ऐसे हैं जिन्हें मनरेगा के तहत प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन (एनआरएम) का फायदा मिला है और यहां विस्थापन 8 प्रतिशत (महेंद्रगढ़, हरियाणा) से लेकर 40 प्रतिशत (नैनीताल, उत्तराखंड) तक है।  सर्वे में कहा गया है, 'सर्वे किए गए 30 जिलों में से 6 जिलों में विस्थापन घटा है, जिसमें महाराष्ट्र के जालना में न्यूनतम 10 प्रतिशत विस्थापन हुआ है। वहीं 24 जिलों में विस्थापन के आंकड़ों में कोई बदलाव नहीं हुआ है।' 

यह अध्ययन देश के 21 राज्यों में कराया गया, जो 14 कृषि जलवायु क्षेत्रों में हैं। करीब 1,200 (हर जिले से 40) लाभार्थी परिवारों को प्रश्नावली दी गई थी। ग्रामीण रोगजार गारंटी योजना का एक मकसद ग्रामीण इलाकों से नौकरी की तलाश में विस्थापन करने वालों को रोकना या कम करना है। सर्वे में पाया गया कि मजदूरी के भुगतान में कुछ मामलों में देरी देखी गई, जबकि 15 दिन में भुगतान अनिवार्य किया गया है। मनरेगा के तहत इस्तेमाल होने वाले सामान के दाम के भुगतान में देरी, मजदूरी के भुगतान से बड़ा संकट बना हुआ है।  
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