कर्जमाफी जहां-जहां कर्ज घटा वहां-वहां

नम्रता आचार्य |  Dec 17, 2017 10:00 PM IST

जिन राज्यों ने कर्जमाफी योजना की शुरुआत की है वहां के ग्रामीण क्षेत्र में बैंक कर्ज में कम वृद्धि देखी जा रही है। ग्रामीण क्षेत्र के कर्ज में कृषि क्षेत्र का योगदान 80 फीसदी से ज्यादा है। देश भर में कृषि क्षेत्र में कर्ज की वृद्धि सितंबर 2017 तक सालाना आधार पर कम होकर करीब 5.8 फीसदी के स्तर पर आ गई जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 15.9 फीसदी के स्तर पर थी। पिछले कुछ सालों में बैंकों द्वारा दिए जाने वाले कृषि कर्जों में यह सबसे ज्यादा गिरावट है। 

 
कृषि क्षेत्र के ऋण में गिरावट का असर अनाज के उत्पादन पर दिखने की संभावना है जिसमें पहले से ही गिरावट का रुझान दिख रहा है। सरकार द्वारा अनाज उत्पादन के लिए पहले अग्रिम फसल अनुमान के मुताबिक देश में वर्ष 2017-18 में कुल अनाज उत्पादन करीब 13.4 करोड़ टन करने की संभावना है जो वर्ष 2016-17 में 13.5 करोड़ टन के पहले अग्रिम अनुमान के लक्षित आंकड़े से थोड़ा ही कम है। वित्त वर्ष 2018 की दूसरी तिमाही में महाराष्ट्र में ग्रामीण क्षेत्र में बैंकों द्वारा दिया जाने वाला कर्ज पिछले साल की समान तिमाही की तुलना में करीब 6 फीसदी कम था जब बैंकों ने करीब 48,856 करोड़ रुपये की शुद्ध रकम का वितरण किया था। उत्तर प्रदेश में जहां व्यापक स्तर पर कृषि कर्जमाफी की घोषणा की गई थी वहां ग्रामीण क्षेत्र में कर्ज की दर में सालाना आधार पर महज 2 फीसदी की वृद्धि देखी गई थी और यह पिछले साल महज 79,400 करोड़ रुपये रही। पिछले साल की समान तिमाही में राज्य ने ग्रामीण क्षेत्र के कर्ज में 20 फीसदी की वृद्धि दर्ज की जो 2 फीसदी की वृद्धि के विपरीत है।
 
कृषि क्षेत्र को दिए जाने वाला कर्ज ऋण का प्राथमिक क्षेत्र माना जाता है और अगर बैंक लक्ष्य को हासिल करने में असफल होते हैं जो उन्हें वह समान रकम कम रिटर्न देने वाले ग्रामीण बुनियादी ढांचा विकास फंड (आरआईडीएफ) में लगाना होता है। इस साल जून में महाराष्ट्र सरकार ने करीब 89 लाख किसानों को 34,000 करोड़ रुपये की कर्जमाफी देने की घोषणा की। इससे पहले उत्तर प्रदेश सरकार ने करीब 2.1 करोड़ किसानों को करीब 36,359 करोड़ रुपये की कर्जमाफी दी थी। इसके अलावा आंध्रप्रदेश सरकार ने भी करीब 20,000 करोड़ रुपये की कर्जमाफी की थी। वहीं पंजाब ने 10,000 करोड़ रुपये, तेलंगाना ने 15,000 करोड़ रुपये, कर्नाटक ने 8,000 करोड़ रुपये की कर्जमाफी दी। 
 
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पास मौजूद आंकड़े के मुताबिक कर्नाटक में ग्रामीण क्षेत्र की ऋण वृद्धि पिछले साल के 17 फीसदी से घटकर इस साल करीब 6 फीसदी तक रह गई। तेलंगाना में यह 20 फीसदी से घटकर करीब 3 फीसदी के स्तर पर सिमट गई। आंध्र प्रदेश में यह करीब 16 फीसदी से कम होकर 14 फीसदी और राजस्थान में भी कृषि ऋण 16 फीसदी से घटकर 10 फीसदी हो गई। 
 
सार्वजनिक बैंक के एक अधिकारी ने बताया, 'कृषि क्षेत्र में फंसे हुए कर्ज (एनपीए) अक्सर रिकॉर्ड में नहीं दिखते क्योंकि ऐसे ऋण का पुनर्गठन काफी तेजी से करने का चलन है। बैंक अब मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं और किसान कर्जमाफी की वजह से फंसे हुए कर्ज में बढ़ोतरी हो रही है और कृषि क्षेत्र की उधारी पर असर पड़ रहा है।'  राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय (एनएसएसओ) के आंकड़े के मुताबिक वर्ष 2003 और 2013 के बीच खेती पर निर्भर परिवारों पर औसत कर्ज बढ़कर लगभग चार गुना हो गया। 70वें एनएसएसओ (2013) में यह खुलासा हुआ कि 6,426 रुपये की औसत मासिक आमदनी पर औसत कर्ज 47,000 रुपये था। वर्ष 2003 में 59वें चरण के सर्वे में यह अंदाजा मिला कि प्रत्येक परिवार पर कर्ज का बकाया करीब 12,585 रुपये था। करीब 8 फीसदी खेती का कर्ज सीमांत किसानों को दिया जाना चाहिए लेकिन बैंक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तरीके से ऐसा कर सकते हैं। आमतौर पर बैंक, सूक्ष्म वित्त संस्थानों या गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के जरिये अप्रत्यक्ष तरीके को अपनाते हैं क्योंकि इससे कर्ज फंसने का जोखिम कम होता है।
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