'असंतुष्ट है युवा वर्ग, कारोबारी खुश'

संजीव मुखर्जी और इंदिवजल धस्माना | नई दिल्ली Dec 21, 2017 10:06 PM IST

नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार का कहना है कि गुजरात चुनाव से संकेत मिला है कि युवा वर्ग असंतुष्ट है और संभवत: उनकी अपेक्षाएं पूरी नहींं हो सकी हैं। कुमार ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा, 'मैं यह नहीं कह रहा हूं कि वे बेरोजगार हैं या वे चुनावी रैलियों में बड़े पैमाने पर मोटरसाइकिलों से नहीं आए। लेकिन यह साफ है कि वे संतुष्ट नहीं हैं क्योंकि उनकी उम्मीदें संभवत: बढ़ी हैं।'
 
उन्होंने कहा कि सरकार को भविष्य में कौशल की जरूरतों का अनुमान लगाने की जरूरत है क्योंकि कौशल की मौजूदा रणनीतियां बेहतर तरीके से काम नहीं कर रही हैं। साथ ही अप्रेंटिसशिप पर ज्यादा ध्यान दिए जाने की जरूरत है।  नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने कहा, '1962 के अधिनियम के मुताबिक कंपनियों के अपने कार्यबल में एक निश्चित संख्या में अप्रेंटिस कराने का प्रावधान है और सरकार इसके लिए दो योजनाओं के माध्यम से 1,250 करोड़ रुपये सब्सिडी देती है। मेरा सुझाव है कि इस राशि को बढ़ाया जाए और नियोक्ताओं को यह आश्वासन दिया जाए कि इसका मतलब यह नहीं हुआ कि उन पर निगरानी बढ़ा दी जाएगी।' 
 
गरीबी रेखा खत्म किए जाने की संभावना पर उन्होंने कहा कि गरीबी के अनुमान सिर्फ सैद्धांतिक कवायद है, जिसका नीति बनाने मेंं आंशिक योगदान होता है। बेहतर विचार यह है कि मानव विकास सूचकांकों पर ज्यादा ध्यान दिया जाए क्योंकि इससे आबादी के वंचित तबके के हित में किए जा रहे काम के उद्देश्यों की पूर्ति होती है, जो गरीबी का अनुमान लगाने से बेहतर है। 
 
उन्होंने कहा, 'गरीबी का अनुमान लगाया जाना व्यापक रूप से सैद्धांतिक कवायद है और इसका नीति निर्माण में बहुत ज्यादा महत्त्व नहीं है। बेहतर विचार यह है कि मानव विकास सूचकांकोंं पर ज्यादा ध्यान केंद्रित किया जाए।'  उन्होंने कहा कि गुजरात चुनाव के परिणाम सरकार की सुधार को लेकर प्रतिबद्धता पर मुहर है। तथ्यों से पता चलता है कि शहरी गुजरात ने भाजपा के पक्ष में दिया, इसका मतलब यह हुआ कि जो लो उम्मीद कर रहे थे कि नोटबंदी और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू किए जाने का बहुत बुरा असर पड़ेगा, उसका कोई खास असर नहींं रहा। कुमार ने कहा, 'परिणाम से यह भी पता चलता है कि कारोबारी समुदाय, जिसके ऊपर नोटबंदी और जीएसटी का असर पडऩे का अनुमान लगाया जा रहा था, औपचारिक अर्थव्यवस्था से बिल्कुल डरा नहीं है और वह औपचारिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनना चाहता है। वहीं वह यह भी चाहते हैं कि इसे लागू करने से जुड़े मसलों का समाधान किया जाए।' 
 
उन्होंने कहा कि इस चुनाव से यह भी संकेत मिले हैं कि कारोबारी और बिजनेसमैन प्रशासन के पारदर्शी, कम विभेदकारी व जवाबदेह होने को पसंद कर रहे हैं। वहीं परिणामों ने कृषि क्षेत्र के बड़े मसले की ओर भी ध्यान आकर्षित किया है। एक साफ संदेश मिला है कि हर स्तर पर सरकार की सब्सिडी पर निर्भर कृषि का 7 दशक से चल रहा मॉडल सदी तरीके से काम नहीं कर रहा है। सरकार को नए तरीके से इसका समाधान निकालने की जरूरत है।
 
नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने कहा कि कृषि क्षेत्र को पटरी पर लाने के लिए कुछ काम प्राथमिकता के आधार पर किए जाने की जरूरत है। इसमें सबसे जरूरी यह है कि कृषि जिंसों के उत्पादन को उपभोग के साथ जोड़ा जाना चाहिए, जो नाटकीय रूप से बदल रहा है। यह अंतर तब खत्म होगा, जब भारत अधिक मूल्य वाले कृषि की ओर बढ़े।  इसके साथ ही किसानोंं को भी मूल्य शृंखला में हिस्सेदार बनाए जाने और सिर्फ उत्पादक के रूप में उनकी भूमिका बदलने की जरूरत है। कुमार ने कहा कि हम मदर डेयरी मॉडल या महाराष्ट्र गन्ना मॉडल देश भर में अपना सकते हैं, जो उत्पादकों को कारोबार में हिस्सेदार बनाता है। 
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