नवंबर में भी घट गया जीएसटी संग्रह

दिलाशा सेठ | नई दिल्ली Dec 26, 2017 09:51 PM IST

सरकार के पास आम बजट से पहले यूं भी कई तरह की चिंता थीं, अब वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) ने नई फिक्र पैदा कर दी है। आंकड़ों के मुताबिक जीएसटी संग्रह नवंबर में और कम हो गया है और जुलाई में नई कर प्रणाली लागू होने के बाद यह निम्नतम स्तर तक लुढ़क गया है। इसके साथ ही निकट भविष्य में जीएसटी दरों में किसी भी तरह की कटौती की उम्मीदों पर भी पानी फिरता लग रहा है।
 
नवंबर में कुल जीएसटी संग्रह घटकर 80,000 करोड़ रुपये ही रह गया। जीएसटी परिषद की बैठक में 200 से अधिक वस्तुओं पर कर की दरें कम करने के कारण भी ऐसा हो सकता है। सरकार ने आज जारी बयान में कहा, 'नवंबर महीने के लिए जीएसटी संग्रह का आंकड़ा 25 दिसंबर तक 80,808 करोड़ रुपये रहा है।' अक्टूबर के 83,346 करोड़ रुपये के जीएसटी संग्रह की तुलना में यह आंकड़ा कम है। राजस्व संग्रह में आई गिरावट के कारण ही जीएसटी परिषद ने 16 दिसंबर की अपनी बैठक में यह ऐलान किया कि राजस्व का नुकसान रोकने और क्रियान्वयन तेज करने के लिए अगले वर्ष 1 जून से देश भर में इलेक्ट्रॉनिक वे बिल आरंभ कर दिए जाएंगे। एक राज्य से दूसरे राज्य में माल भेजने के लिए बिल की प्रक्रिया अगले वर्ष 1 अप्रैल से चालू होनी थी, लेकिन उसे 1 फरवरी से ही लागू कर देने की घोषणा भी की गई। परिषद के एक वरिष्ठï अधिकारी ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, 'अब परिषद का मुख्य ध्यान राजस्व आंकड़ों में स्थिरता लाने पर होगा। दरों में कटौती पर अब कोई भी फैसला बजट के बाद ही लिया जाएगा।' 
 
जीएसटी परिषद की 15 नवंबर की बैठक में डिटरजेंट, शैंपू और सौंदर्य उत्पादों समेत 176 उत्पादों पर जीएसटी की दर 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दी गई थी। दो अन्य उत्पादों पर दर घटाकर 12 प्रतिशत कर दी गई थी। इस तरह 28 प्रतिशत के सर्वोच्च जीएसटी दायरे में केवल 50 वस्तुएं रह गई थीं। केंद्र सरकार के बजट अनुमानों और राज्यों के लिए विशेष फॉर्मूला के आधार पर यह अनुमान लगाया गया है कि केंद्र और राज्यों को हर महीने 91,000 करोड़ रुपये का जीएसटी वसूलना होगा।
 
जीएसटी राजस्व में कमी के बाद केंद्रीय वित्त सचिव हसमुख अढिया ने अधिकारियों को पहले पांच महीनों में वसूले गए राजस्व की तुलना पिछले साल की समान अवधि के आंकड़ों से करने का निर्देश दिया। सरकार ने उन करदाताओं को भी नोटिस भेजने के लिए कहा है, जिन्होंने कर जमा नहीं किया है।  पीडब्ल्यूसी में लीडर-अप्रत्यक्ष कर, प्रतीक जैन ने कहा, 'नवंबर में जीएसटी संग्रह कम होने की पहले से ही आंशका थी क्योंकि नवंबर में 175 से अधिक वस्तुओं पर दरें कम की गई थीं। निर्यातकों को मिले रिफंड का असर भी आंकड़ों पर दिखा है।
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